संभाजीनगर में आयोजित बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके ने पार्टी के भविष्य के एजेंडे और मास्टरप्लान को लेकर बड़ा खुलासा किया है. लगातार लोगों की आ रही प्रतिक्रियाओं और सवालों के बाद CJP ने ऐलान किया है कि आगामी सितंबर महीने से पार्टी देशभर में एक बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने जा रही है. इस अभियान को 'क्या बोलती पब्लिक' नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य सीधे जनता और युवाओं के बीच जाकर उनकी बात सुनना और उनसे संवाद स्थापित करना है. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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जनता की आवाज सुनने के लिए सड़कों पर उतरेगी CJP
अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर के अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि अक्सर आम जनता और युवाओं की फ्रस्ट्रेशन की मुख्य वजह यह होती है कि उन्हें इग्नोर और डिसमिस कर दिया जाता है. कोई उनसे उनकी समस्याओं, सपनों और देश को लेकर उनकी उम्मीदों के बारे में बात नहीं करता. देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा देश का भविष्य हैं. ऐसे में युवाओं को नजरअंदाज करके कोई भी राजनीतिक या नीतिगत फैसला नहीं लिया जा सकता. CJP देश के सबसे बड़े स्टेकहोल्डर्स यानी देश के युवाओं से सीधा परामर्श करने के लिए देशभर का दौरा करेगी.
राजनीतिक विमर्श में बदलाव की मांग, शिक्षा-बेरोजगारी पर जोर
CJP ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह एक प्रेशर ग्रुप के रूप में काम कर रही है ताकि देश का पॉलिटिकल डिस्कोर्स (राजनीतिक विमर्श) बदला जा सकें. आज चुनाव के वक्त श्मशान-कब्रिस्तान या 'बटोगे तो कटोगे' जैसी बातें की जाती हैं, जिससे युवाओं को न तो नौकरियां मिल रही हैं और न ही बेहतर शिक्षा. पार्टी का मानना है कि राजनीति में केवल भाषण नहीं, बल्कि युवाओं के मन की बात, रोजगार, महंगाई और शिक्षा जैसे वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए.
प्राइवेट स्कूलों पर फीस कैप और बंद होते सरकारी स्कूलों पर जताई चिंता
पार्टी के सबसे बड़े प्राथमिकता वाले मुद्दों में शिक्षा सुधार शामिल है. आज देश में शिक्षा बेहद महंगी और आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुकी है. पिछले 10 सालों में देशभर में करीब 94,000 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जिन्हें सुधारा और रेनोवेट किया जा सकता था. इसका सीधा फायदा प्राइवेट स्कूलों को मिल रहा है, जहां पहली-दूसरी कक्षा की फीस भी लाखों में पहुंच गई है. CJP मांग करती है कि प्राइवेट स्कूलों की फीस पर कैपिंग (सीमा) तय होनी चाहिए और सरकार को सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. साथ ही, उच्च शिक्षा और कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा तथा डोनेशन के नाम पर होने वाली सीटों की बिक्री पर भी रोक लगाने की मांग की गई है.
संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग
शिक्षा सुधारों के अलावा CJP ने देश की प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं की गिरती साख और जवाबदेही पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. देश के राजनीतिक सिस्टम में दलबदल और ईडी-सीबीआई जैसी एजेंसियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि इससे लोगों का लोकतंत्र पर से भरोसा उठ रहा है. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए कहा गया कि आज स्थिति ऐसी बन गई है कि 'सरकार चुन रही है कि वोटर कौन होगा'. इसके अलावा न्यायपालिका का जिक्र करते हुए कहा गया कि सामान्य नागरिकों को त्वरित न्याय और हियरिंग नहीं मिलती, जबकि हाई-प्रोफाइल मामलों, सरकार गिराने-बनाने या नेताओं के केस में देर रात सुनवाई हो जाती है. CJP इन सभी संस्थागत जवाबदेहियों को फिक्स करने के लिए लड़ाई लड़ेगी.
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प्रशांत किशोर की जीत से लेकर आंदोलन की रणनीति तक...CJP नेता आशुतोष रांका ने बताई पूरी बात!
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