CJP Protest News: सोमवार को CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक हुई. बैठक के बाद CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत कर संगठन की ओर से लिए गए फैसलों की जानकारी दी. सौरव दास ने बताया कि CJP ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर वहां के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर जवाब मांगा है. साथ ही, मांगें पूरी नहीं होने के विरोध में CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है.
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सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को भेजा गया पत्र
बैठक के बाद सौरव दास ने बताया कि CJP ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को एक लेटर लिखा है. इसमें स्कूलों की मौजूदा स्थिति, बजट आवंटन, अब तक हुए रिनोवेशन, खेल की सुविधाओं की उपलब्धता और लंबित पड़े रिनोवेशन कार्यों को लेकर सवाल पूछे गए हैं.
वहीं आशुतोष रांका ने बताया कि 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत CJP ने दावा किया कि पूरे देश के सरकारी स्कूलों में लगभग 10 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. छात्र नेताओं ने सभी शिक्षा मंत्रियों से एक महीने के भीतर अपने-अपने राज्यों के स्कूलों की स्थिति सुधारने का रोडमैप जारी करने की मांग की है.
CJP की मुख्य मांगें
- FIR और केस वापस लिए जाएं: NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं पर दर्ज सभी FIR और मुकदमे बिना किसी शर्त के वापस लिए जाएं.
- प्रदर्शन करने वाले छात्रों को परेशान न किया जाए: आगे किसी भी छात्र या युवा को प्रदर्शन करने पर पुलिस या प्रशासन की ओर से निशाना न बनाया जाए.
- पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिले: NEET पेपर लीक मामले के चलते जिन छात्रों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए.
- लिखित गारंटी: सरकार ने पूर्व में जो लिखित और मौखिक समझौते किए दिए थे उन्हें लागू किया जाए.
5 सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक प्रोटेस्ट मार्च
सौरव दास ने बताया किआगामी 5 सितंबर को देश के युवा और छात्र संगठन इंडिया गेट पर एकत्र होंगे और वहां से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे.
प्रोटेस्ट मार्च की वजह बताते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था. सरकार ने आश्वासन दिया था कि NEET पेपर लीक प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर दर्ज हुई एफआईआर वापस ली जाएगी, भविष्य में किसी प्रदर्शनकारी को टारगेट नहीं किया जाएगा और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा. हालांकि, इन वादों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई या लिखित समझौता नहीं हुआ है, जिसे छात्र नेताओं ने देश के युवाओं के साथ विश्वासघात करार दिया.
'एफआईआर और बैन से नहीं डरेगा देश का युवा'
महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों में स्कूलों की बदहाली का वीडियो या फोटो बनाने पर दर्ज हो रही एफआईआर और वीडियोग्राफी बैन पर सौरव दास ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामियां छिपाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है.
सौरव दास ने सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए युवाओं के साथ मिलकर स्कूलों का जमीनी ऑडिट करें और कमियों को सुधारने में सहयोग दें, न कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए एफआईआर का सहारा लें.
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