छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच छात्र संगठन के प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों से 25 जुलाई को हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने की मांग की है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकारों ने अपनी बातचीत और वादों का सम्मान नहीं किया, तो छात्रों को एक बार फिर से सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. इससे पहले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी प्रवक्ता सौरव दास भी सरकार को आंदोलन की चेतावनी दे चुके है. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.
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बिहार और बंगाल सरकार द्वारा FIR वापस लेने का दावा
आशुतोष रांका ने जानकारी दी कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिहार सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (FIR) को वापस ले लिया है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में भी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को वापस लेने की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने छात्रों के हित में कदम उठाने के लिए सरकारों से अपील की कि वे किसी भी सूरत में युवाओं को निशाना न बनाएं.
राजस्थान पुलिस पर परेशान करने का आरोप
राजस्थान का जिक्र करते हुए आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि राज्य की पुलिस कोर टीम के सदस्यों को निशाना बना रही है. उन्होंने बताया कि राजस्थान में उनकी कोर टीम के कई सदस्यों के घरों पर पुलिस लगातार दबिश दे रही है और फोन कॉल करके उन्हें परेशान किया जा रहा है. रांका ने राजस्थान पुलिस से कड़े शब्दों में निवेदन किया कि वह छात्र नेताओं और बच्चों को परेशान करना तुरंत बंद करे.
केंद्र सरकार से लिखित समझौते को जारी करने की मांग
केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 25 जुलाई को जो समझौता तय हुआ था, उसका लिखित दस्तावेज (रिटन एग्रीमेंट) कल तक मिल जाना चाहिए था. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह उस लिखित समझौते को जल्द से जल्द जारी करें ताकि इस पूरे प्रकरण को आधिकारिक तौर पर समाप्त किया जा सके. उन्होंने दोहराया कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरी नहीं उतरती हैं, तो छात्रों के पास दोबारा आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा.
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CJP ने सरकार को फिर दिया अल्टीमेटम, अभिजीत दीपके ने कहा- 'अगर गवर्नमेंट नहीं सुधरती है तो...'
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