CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका पहुंचे हाईकोर्ट, हिरासत बढ़ाने के आदेश को दी चुनौती

अनीशा माथुर

• 07:56 PM • 20 Oct 2026

CJP News: कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. दोनों की कानूनी टीम ने जमानतदारों को अयोग्य ठहराने और हिरासत बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए छुट्टियों के दौरान तत्काल सुनवाई की मांग की है. जानिए SEM कोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के क्या आधार बताए थे और बचाव पक्ष ने क्या दलीलें दीं.

CJP News
CJP News
Google CTA

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. दोनों की ओर से दलील दी गई है कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) का आदेश कानूनी रूप से उचित नहीं है. याचिका में कहा गया है कि जमानतदारों को अयोग्य ठहराने और न्यायिक हिरासत बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं. इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था.

Read more!

दोनों की कानूनी टीम ने दिल्ली हाईकोर्ट से छुट्टियों के दौरान मामले की तत्काल सुनवाई करने की मांग की है. वकीलों के मुताबिक, वे सुनवाई के संबंध में हाईकोर्ट की रजिस्ट्री के जवाब का इंतजार कर रहे हैं. CJP की रत्ना सिंह ने भी बताया कि संगठन ने रात में ही तत्काल सुनवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को एक मिनट भी जेल में नहीं रहना चाहिए और राजनीतिक खेल के कारण उनकी आजादी नहीं छीनी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि न्याय मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए. इस बीच, दोनों नेताओं से जुड़े अतिक्रमण के मामले को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है. अब हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई को लेकर कानूनी टीम की नजर बनी हुई है.

SEM कोर्ट ने किन आधारों पर बढ़ाई थी न्यायिक हिरासत?

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका ने 11 अक्टूबर को दिए गए बॉन्ड का जानबूझकर उल्लंघन किया था. आदेश में कहा गया कि इसके तुरंत बाद ऐसी गतिविधि हुई, जिससे शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई. कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का हवाला देते हुए उनके व्यवहार और प्रतिबंधित क्षेत्रों में बार-बार प्रदर्शन बुलाने को लेकर चिंता जताई थी.

आदेश में यह भी कहा गया कि दोनों ने भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं करने का भरोसा दिया था, लेकिन जांच अधिकारी की ओर से पेश की गई सामग्री के आधार पर इस आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को भी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले का आधार बताया.

जमानतदारों को क्यों माना गया अयोग्य?

SEM कोर्ट ने जमानत के लिए पेश किए गए दोनों जमानतदारों से पूछताछ के बाद उन्हें अयोग्य माना था. आदेश के अनुसार, एक जमानतदार के बॉन्ड और आधार कार्ड पर लगी तस्वीरों में अंतर पाया गया. वह इस अंतर को स्पष्ट करने के लिए कोई दूसरा वैध पहचान पत्र भी पेश नहीं कर सका. कोर्ट ने उसके जवाबों को संतोषजनक नहीं माना.

दूसरे जमानतदार के बारे में आदेश में कहा गया कि वह सौरव दास के माता-पिता और पते जैसी बुनियादी जानकारी नहीं बता सका. कोर्ट के मुताबिक, दोनों जमानतदार यह भरोसा भी नहीं दिला सके कि जरूरत पड़ने पर वे सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत में पेश करा पाएंगे. इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें अयोग्य माना और नए जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया था.

बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्या दलील दी थी?

मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से वकीलों ने तत्काल रिहाई की मांग की थी. बचाव पक्ष ने भरोसा दिलाया था कि दोनों कथित गतिविधि दोबारा नहीं करेंगे. वकीलों ने यह भी कहा था कि 10 अक्टूबर 2026 के बाद उन्होंने प्रदर्शन का कोई आह्वान नहीं किया और दोनों अलग-अलग जंतर-मंतर गए थे.

हालांकि, SEM कोर्ट ने दोनों को लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया था. मामले को आगे की सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया गया था. इस बीच, एहतियाती कदमों की जरूरत का हवाला देते हुए कोर्ट ने दोनों को 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था.

अब सौरव दास और आशुतोष रांका ने इसी आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उनकी याचिका में न्यायिक हिरासत बढ़ाने और जमानतदारों को अयोग्य ठहराने के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं. दोनों की कानूनी टीम ने छुट्टियों के दौरान तत्काल सुनवाई की मांग की है. हाईकोर्ट में सुनवाई कब होगी और याचिका पर क्या फैसला आता है, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी.

CJP के अभिजीत दिपके ने वीडियो जारी कर 'कॉकरोचों' से की अपील, बोले- 'त्योहारों में अपने परिवार के साथ बिताएं समय'