दिल्ली के इस इलाके में नलों से आ रहा 'क्रूड ऑयल' जैसा काला पानी, सीवर की बदबू से लोग बेहाल...देखें ग्राउंड रिपोर्ट

Delhi Water Crisis: दिल्ली के दक्षिणपुरी, देवली, संगम विहार और अंबेडकर नगर में पानी का गंभीर संकट गहराता जा रहा है. कई इलाकों में नलों से 'क्रूड ऑयल' जैसा काला और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिससे लोगों में बीमारी का डर बढ़ गया है. सरकारी टैंकर नहीं पहुंचने पर लोग 1500 रुपये देकर प्राइवेट टैंकर मंगाने को मजबूर हैं. पढ़ें दिल्ली के जल संकट और जहरीले पानी की ग्राउंड रिपोर्ट.

Delhi Water Shortage
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आशुतोष मिश्रा

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देश की राजधानी दिल्ली इस समय भीषण गर्मी के साथ-साथ पानी के गंभीर संकट से जूझ रही है. दिल्ली के कई इलाकों में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोगों को पीने और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा है. दक्षिणी दिल्ली के दक्षिणपुरी, संगम विहार, देवली और अंबेडकर नगर जैसे इलाकों में पानी की किल्लत ने विकराल रूप ले लिया है.

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यहां के सैकड़ों परिवार पिछले एक से दो महीने से पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं. इस संकट के बीच दिल्ली सरकार और जल बोर्ड के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है, जहां लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए मीलों का सफर तय करने को मजबूर हैं.

नलों से टपक रहा है 'जहरीला काला पानी'

दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में कुछ जगहों पर पानी की नई पाइपलाइनें तो बिछा दी गई हैं, लेकिन जब इन नलों को खोला जाता है तो उसमें से साफ पानी की जगह जहरीला और बदबूदार पानी निकलता है. ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जब घरों की टोटियों को खोला गया, तो उसमें से निकलने वाला पानी बिल्कुल 'क्रूड ऑयल' की तरह पूरी तरह काला और गाढ़ा दिखाई दिया. 

इस पानी से सीवर और नाले जैसी बेहद तेज बदबू आ रही है, जिसके पास खड़ा होना भी दूभर है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरी तरह से सीवर का गंदा पानी है जिसे कोई पी नहीं सकता और न ही इससे नहाया जा सकता है. साफ पानी के नाम पर जनता को यह जहरीला पानी परोसा जा रहा है जो किसी को भी गंभीर रूप से बीमार कर सकता है.

बिना नहाए स्कूल-दफ्तर जाने की मजबूरी

पानी की इस भयंकर किल्लत के कारण स्थानीय लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है. घरों में रखे प्लास्टिक के बाल्टी और ड्रम पूरी तरह सूखे पड़े हैं. हालात इतने खराब हैं कि दफ्तर जाने वाले बड़े बुजुर्ग और स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे बिना नहाए-धोए घर से निकलने को मजबूर हैं. जिन लोगों के रिश्तेदार दिल्ली के दूसरे इलाकों जैसे मदनगीर या अन्य जगहों पर रहते हैं, वे पानी के लिए वहां शरण ले रहे हैं. महिलाएं और पुरुष अपने घरों के गंदे कपड़े गठरियों में बांधकर रिश्तेदारों के घर ले जा रहे हैं ताकि वहां जाकर उन्हें धो सकें और खुद भी नहा-धोकर आ सकें.

सरकारी टैंकर गायब, 1500 रुपये में प्राइवेट टैंकर का सहारा

सरकार और प्रशासन की तरफ से यह दावा किया जा रहा है कि प्रभावित इलाकों में पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने आज तक सरकारी टैंकर इस इलाके में आते नहीं देखा.

पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए गली के लोग आपस में पैसे इकट्ठा करके 1500 रुपये में प्राइवेट टैंकर मंगवा रहे हैं. कुछ लोग प्राइवेट टैंकर वालों को एडवांस बुकिंग करा रहे हैं, लेकिन पैसे देने के बावजूद कई दिनों तक टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं. जिन परिवारों के पास पैसे नहीं हैं, उनके छोटे-छोटे बच्चे तपती धूप में सड़कों और ट्यूबवेल से पानी के डब्बे साइकिल या मोटरसाइकिल पर ढोने को मजबूर हैं.

चक्कर काट कर थके लोग, प्रदर्शन का भी नहीं हुआ असर

पानी की समस्या से परेशान होकर स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर दिल्ली जल बोर्ड तक के चक्कर काटे हैं. यहां तक कि राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी लोगों को लेकर अधिकारियों के पास गए, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा. अधिकारियों की इस बेरुखी से तंग आकर लोगों ने सड़कों पर उतरकर चक्का जाम और प्रदर्शन भी किया, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी.

लोगों की शिकायत है कि नलों में हफ्तों तक पानी नहीं आता और जब कभी आता भी है, तो वह इतना गंदा और बदबूदार होता है कि उसका किसी भी काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. भीषण गर्मी के इस मौसम में दिल्ली की जनता बुनियादी हक यानी साफ पानी के लिए भी पूरी तरह बेबस नजर आ रही है.

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