दिल्ली बस गैंगरेप केस: निर्भया जैसी दरिंदगी वाली बस को लेकर चौंकाने वाले खुलासे, सिस्टम पर भी उठने लगे सवाल!

Delhi Bus Gangrape Case: दिल्ली के रानीबाग इलाके में चलती बस में महिला से गैंगरेप मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. बिहार नंबर की जिस बस में वारदात हुई, उस पर लाखों रुपये का जुर्माना बकाया था और उसे डिजिटल रूप से इंपाउंड किया जा चुका था. जानिए निर्भया कांड जैसी इस घटना में पुलिस, परिवहन विभाग और सिस्टम पर क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल.

Delhi Bus Gangrape Case Update
Delhi Bus Gangrape Case Update

दिनेश यादव

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देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर 14 साल पहले हुए निर्भया कांड जैसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है. रानीबाग इलाके में एक चलती बस में 30 साल की महिला के साथ बस के ही ड्राइवर और कंडक्टर ने करीब 2 घंटे तक दरिंदगी की. इस घटना ने न केवल महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि उस बस को लेकर हुए खुलासों ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है. पुलिस ने आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है और वारदात में इस्तेमाल बस को सीज कर दिया गया है.

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बिहार नंबर की बस और गोपालगंज कनेक्शन

वारदात में इस्तेमाल की गई बस का कनेक्शन बिहार के गोपालगंज से जुड़ा है. इस बस का नंबर प्लेट 'BR' सीरीज का है और यह गोपालगंज के परिवहन विभाग में रजिस्टर्ड है. जांच में सामने आया है कि यह बस 'साईं दृष्टि प्राइवेट लिमिटेड' के नाम पर पंजीकृत है, जिसका मालिक हैप्पी मल्होत्रा बताया जा रहा है, जो सिधवालिया थाना क्षेत्र के रामपुर सदौवा गांव का निवासी है.

नियमों की धज्जियां और लाखों का बकाया जुर्माना

परिवहन विभाग की जांच में इस बस को लेकर बेहद चौंकाने वाली जानकारी मिली है. इस बस पर परमिट, इंश्योरेंस, ओवरलोडिंग और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए करीब 4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इसमें से मालिक ने केवल 1 लाख रुपये जमा किए थे, जबकि 3 लाख रुपये अब भी बकाया हैं. जुर्माना जमा न होने के कारण विभाग ने इस बस को 'डिजिटली इंपाउंड' कर दिया था, जिसका मतलब है कि इसे सड़क पर चलाने की कानूनी अनुमति नहीं थी. इसके बावजूद, यह बस बेधड़क बिहार से दिल्ली के बीच सड़कों पर दौड़ रही थी.

काले शीशे और अवैध संचालन: प्रशासन पर उठे सवाल

इस बस के संचालन और बनावट ने दिल्ली पुलिस की चौकसी पर गंभीर सवाल उठाए हैं. नियमों के मुताबिक किसी भी प्राइवेट या टूरिस्ट बस में काले शीशे नहीं हो सकते और इमरजेंसी एग्जिट का होना अनिवार्य है. लेकिन इस बस के शीशे पूरी तरह काले थे और इसमें इमरजेंसी एग्जिट की सुविधा भी नहीं थी. सवाल यह उठ रहा है कि दिल्ली के बॉर्डर पर 24 घंटे तैनात रहने वाली पुलिस और सीसीटीवी कैमरों की नजरों से बचकर यह बस शहर के अंदर कैसे दाखिल हुई? यह अंदेशा जताया जा रहा है कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों और सेटिंग की वजह से बिना मानक पूरे किए भी यह बस सड़कों पर चल रही थी.

कैसे हुई वारदात?

घटना वाली रात यह बस बिहार से सवारियां लेकर दिल्ली पहुंची थी. सवारियों को उतारने के बाद बस पार्किंग के लिए जा रही थी. इसी दौरान सरस्वती विहार के बस स्टॉप पर महिला ने बस कंडक्टर से समय पूछा. समय बताने के बहाने कंडक्टर ने महिला को बस के अंदर खींच लिया, जहां ड्राइवर और कंडक्टर ने मिलकर उसके साथ बलात्कार किया और फिर उसे सड़क पर फेंक कर फरार हो गए.

इस पूरी घटना ने दिल्ली प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली को शर्मसार कर दिया है, क्योंकि अगर नियमों का उल्लंघन करने वाली इस इंपाउंडेड बस को समय रहते रोका गया होता, तो शायद यह वारदात टाली जा सकती थी.

यहां देखें वीडियो

दिल्ली में निर्भया जैसा कांड! चलती स्लीपर बस में महिला से गैंगरेप, ड्राइवर और कंडक्टर ने पार की हैवानियत की हदें

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