देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में बीते 3 जून को हुए फ्लोरिश स्टे होटल अग्निकांड ने पूरे देश को दहला कर रख दिया था. इस भयानक हादसे में 21 बेकसूर लोगों ने अपनी जान गंवा दी. लेकिन अब इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद हैरान और विचलित करने वाले खुलासे हो रहे हैं. होटल के लाइसेंस संचालन और फायर सेफ्टी नियमों को ताक पर रखकर मौत का जो खेल खेला जा रहा था, उसकी पूरी कुंडली अब पुलिस के हाथ लग चुकी है. पुलिस ने इस मामले में होटल मालिक लवकेश बजाज और उसके सबसे वफादार अकाउंटेंट जय मिश्रा को गिरफ्तार किया है. दोनों से हुई पूछताछ में एक ऐसा सच सामने आया है, जो बेहद खौफनाक है.
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कर्मचारी के नाम पर लाइसेंस और मलाई खा रहा था मालिक
पुलिस पूछताछ में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा खुद होटल के अकाउंटेंट जय मिश्रा ने किया है. जय मिश्रा ने बताया कि होटल का लाइसेंस बनवाने के लिए मालिक लवकेश बजाज ने अपने दस्तावेजों का इस्तेमाल नहीं किया था, बल्कि उसके कागजातों का इस्तेमाल किया था. यानी कानून की नजरों में कागजी तौर पर पूरी जिम्मेदारी एक कर्मचारी के सिर मढ़ी जा रही थी, जबकि होटल से होने वाली मोटी कमाई सीधे मालिक की जेब में जा रही थी.
इतना ही नहीं, जय मिश्रा ने कबूल किया कि 3 जून को जिस दिन होटल में इतनी भीषण आग लगी, वह घटना वाली जगह पर आया था. वहां थोड़ी देर रुकने के बाद, जब लोग अपनी जान बचाने के लिए चीख-पुकार मचा रहे थे, तब यह वफादार अकाउंटेंट मेट्रो पकड़ कर पूरे शहर में इधर-उधर घूमता रहा.
अकाउंटेंट जय मिश्रा ने किए 5 बड़े खुलासे
पुलिस की कड़ाई से हुई पूछताछ में जय मिश्रा ने पांच बड़े खुलासे किए हैं, जिससे साफ होता है कि होटल की पूरी कमान और मैनेजमेंट उसी के हाथों में थी. पहले खुलासे के तहत जय मिश्रा कोई नया कर्मचारी नहीं था, वह पिछले 10 सालों से लवकेश बजाज के साथ अकाउंटेंट के तौर पर जुड़ा हुआ था. दूसरे खुलासे में पता चला कि वह लवकेश बजाज का सबसे भरोसेमंद आदमी था, जिसे हर महीने लगभग 35,000 रुपए सैलरी मिलती थी.
तीसरे खुलासे के मुताबिक होटल का रोजमर्रा का जितना भी कामकाज और मैनेजमेंट था, वह काफी हद तक जय मिश्रा ही संभालता था. चौथे खुलासे में उसने बताया कि होटल में बाकी स्टाफ की ड्यूटी लगाना और किसे कब आना है, यह सब भी जय मिश्रा के ही जिम्मे था. पांचवें और सबसे अहम खुलासे के तहत होटल में रुकने वाले मेहमानों से जुड़े जितने भी रिकॉर्ड्स और रजिस्टर थे, वे भी जय मिश्रा के पास ही होते थे.
कागजात जलने का दावा, पुलिस खंगाल रही सरकारी रिकॉर्ड
जब दिल्ली पुलिस ने आरोपी जय मिश्रा से मेहमानों के रजिस्टर, उनकी पहचान के रिकॉर्ड्स और सबसे जरूरी होटल के लाइसेंस के कागजात मांगे, तो उसने एक रटा-रटाया दावा ठोक दिया. मिश्रा का कहना था कि सभी रिकॉर्ड्स और दस्तावेज होटल में ही रखे हुए थे, जो आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गए. हालांकि, पुलिस इस दावे को इतनी आसानी से मानने के मूड में नहीं है.
जांच अधिकारी होटल के इन कागजी रिकॉर्ड्स को फिर से तैयार करने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों, ऑनलाइन पोर्टलों और संबंधित एजेंसियों से डाटा इकट्ठा कर रहे हैं. पुलिस इस एंगल से भी गहराई से जांच कर रही है कि क्या लाइसेंस की मंजूरी प्रक्रिया में किसी सरकारी विभाग या अधिकारी की मिलीभगत या कोई बड़ी गड़बड़ी तो नहीं है.
मुनाफे के लालच में 6 की जगह बना दिए 25 कमरे
इस पूरे मामले में जो सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, वह है होटल के कमरों की संख्या. फ्लोरिश स्टे होटल सिल्वर कैटेगरी के तहत बेड एंड ब्रेकफास्ट (Bed and Breakfast) के तौर पर रजिस्टर्ड था. इसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के मुताबिक, इसे सिर्फ और सिर्फ छह कमरों का लाइसेंस मिला हुआ था, जिसमें पहली मंजिल पर तीन कमरे और दूसरी मंजिल पर तीन कमरे दर्ज थे. लेकिन मुनाफा कमाने के लालच में नियमों को ताक पर रखकर इस पूरी इमारत के अंदर करीब 25 कमरे धड़ल्ले से चलाए जा रहे थे. यानी क्षमता से चार गुना ज्यादा कमरे बना दिए गए, जो बाद में 21 लोगों के लिए काल बन गए.
विदेशी नागरिकों सहित 21 लोगों की दर्दनाक मौत
चश्मदीदों के मुताबिक, सुबह करीब 8:30 बजे जब होटल में आग लगी, तो कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत में भयंकर काला धुआं फैल गया. ऊपरी मंजिल पर ठहरे हुए लोगों को संभलने और बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला. हालांकि, फायर सर्विस, पुलिस और स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 58 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला.
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में 35 लोग और उन्हें बचाते हुए 10 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. मैक्स हॉस्पिटल के आंकड़ों के मुताबिक, वहां 39 लोगों को लाया गया था, जिनमें से 18 की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी. अब तक कुल मृतकों का आंकड़ा 21 पहुंच चुका है, जिनमें 10 भारतीय और 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं. विदेशी मृतकों में 9 अफ्रीकी देशों के और 2 टर्की के नागरिक थे.
हादसे की 4 सबसे बड़ी वजहें आई सामने
दिल्ली पुलिस की जांच में इस भयानक हादसे के पीछे पांच सबसे बड़ी वजहें सामने आई हैं. पहली वजह यह थी कि इमारत की खिड़कियां पूरी तरह से बंद थीं, वेंटिलेशन जीरो था और आने-जाने का सिर्फ एक ही संकरा रास्ता था. इमरजेंसी एग्जिट यानी फायर एस्केप की कोई व्यवस्था नहीं होने से यह इमारत चिमनी बन गई और धुआं कुछ ही सेकंड में ऊपर पहुंच गया. दूसरी वजह यह रही कि होटल का जो मुख्य सेंसर आधारित ऑटोमेटिक गेट था, वह बिजली कटते ही बंद हो गया, जिससे लोग अंदर ही फंस गए.
तीसरी वजह यह सामने आई कि होटल में लगे स्मोक डिटक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे जरूरी उपकरण सिर्फ दिखावे के थे और इनमें से कोई भी काम नहीं कर रहा था . चौथी बड़ी वजह यह थी कि ग्राउंड फ्लोर पर कई भारी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अवैध तरीके से रखे गए थे, जिसके लिए कोई फायर आइसोलेशन सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी.
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