दिल्ली के देवली में पानी के लिए मची त्राहि-त्राहि...4 मंजिल ऊपर पानी ढोने को मजबूर लोग, देखिए कैमरे पर क्या-कुछ कहा!

Delhi Water Crisis: दिल्ली के देवली विधानसभा क्षेत्र के दक्षिणपुरी ब्लॉक-10 में पानी का गंभीर संकट लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है. भीषण गर्मी के बीच इलाके के 250 से ज्यादा घरों में कई हफ्तों और महीनों से पानी नहीं पहुंचा है, जिससे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. महिलाएं और बच्चे चार-चार मंजिल तक पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि पीने का पानी भी कालाबाजारी के जरिए महंगे दामों पर बिक रहा है.

Delhi Water Crisis
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आशुतोष कुमार

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राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है. दिल्ली के देवली विधानसभा क्षेत्र के दक्षिणपुरी इलाके के ब्लॉक नंबर 10 में हालात बेहद बदतर हो चुके हैं. यहां के स्थानीय लोग बीते कई हफ्तों से पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं. नल पूरी तरह से सूखे पड़े हैं, जिसके कारण लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए बूंद-बूंद पानी को मोहताज होना पड़ रहा है. पानी की इस भीषण क्राइसिस से परेशान महिलाओं और स्थानीय निवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है और वे सरकार तथा स्थानीय नेताओं के खिलाफ जमकर आक्रोश जाहिर कर रहे हैं.

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हफ्तों और महीनों से नहीं आया पानी, घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग

दक्षिणपुरी के ब्लॉक नंबर 10 और इसके आसपास के करीब 250 से 300 घरों में पानी की यह समस्या बनी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ गलियों में बीते दो हफ्तों या 14 दिनों से पानी नहीं आया है, तो कुछ लोगों का कहना है कि वे पिछले दो से ढाई महीने से इस किल्लत को झेल रहे हैं. पानी न आने की वजह से स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि एक महिला को अपनी प्रेगनेंसी के दौरान पानी की भारी किल्लत के चलते अपना घर छोड़कर मायके जाना पड़ गया. महिलाओं का कहना है कि घर में मियां-बीवी और बच्चों समेत पूरे परिवार को सुबह फ्रेश होने, नहाने और खाना बनाने के लिए पानी चाहिए होता है, लेकिन एक बूंद पानी न मिलने से पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.

चार-चार मंजिल ऊपर पानी ढोने की मजबूरी

इलाके में बहुमंजिला मकान बने हुए हैं, जहां तीसरी और चौथी मंजिल पर रहने वाले लोगों के लिए पानी ऊपर ले जाना एक बड़ी चुनौती बन गया है. पानी की भारी बाल्टियां और 20-20 लीटर के केन हाथों और कंधों पर उठाकर सीढ़ियों से ऊपर ले जाने पड़ रहे हैं. दिन भर पानी ढोने के कारण महिलाओं के हाथ लाल पड़ जा रहे हैं और वे शारीरिक रूप से बुरी तरह थक चुकी हैं. कई परिवारों में बुजुर्ग महिलाएं और कम दिमाग के बच्चे हैं, जिनके लिए पानी का इंतजाम करना और भी मुश्किल हो रहा है. पानी न होने के कारण स्थिति यह है कि लोग कई-कई दिनों तक नहा भी नहीं पा रहे हैं और घरों में दो-दो महीने से कपड़े तक नहीं धुले हैं.

पानी के नाम पर कालाबाजारी, मनमाने दामों पर बिक रहा पानी

नलके में पानी न आने के कारण लोग दूर-दराज के इलाकों या दूसरे ब्लॉकों से, जहां पानी आ रहा है, वहां से पानी ढोने को मजबूर हैं. कई लोग तो साइकिल, बाइक, रिक्शा और कंधों पर पानी की बोतलें ढो रहे हैं. इसके अलावा, पीने के पानी के लिए लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. मौके का फायदा उठाकर पानी बेचने वाले लोग मनमानी कीमतें वसूल रहे हैं. 20 लीटर की पानी की जो बोतल सामान्य दिनों में कम दाम में मिलती थी, उसे अब 40, 50, 60 रुपये से लेकर 100 और 150 रुपये तक में बेचा जा रहा है. लोग अपनी जेब से हजारों रुपये का पानी खरीद रहे हैं, फिर भी पूरे परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं.

जुगाड़ के भरोसे जिंदगी, लंबी-लंबी पाइपों से खींच रहे पानी

पानी की इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय निवासियों ने अपने स्तर पर जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है. लोग पतली-पतली पाइपों को आपस में जोड़कर दूसरे ब्लॉकों या उन घरों से पानी खींच रहे हैं जहां थोड़ा-बहुत पानी आ रहा है. इसके लिए लोगों को बेहद लंबी-लंबी प्राइवेट पाइपें लगानी पड़ रही हैं और काफी दूर से कनेक्शन जोड़कर बहुत ही धीमी रफ्तार से आ रहे पानी को डब्बों और ड्रमों में भरना पड़ रहा है.

नेताओं के खिलाफ फूटा गुस्सा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे हर महीने पानी और अन्य चीजों का बिल ईमानदारी से सरकार को देते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पानी नहीं दिया जा रहा है. पानी की समस्या को लेकर लोग स्थानीय विधायक प्रेम चौहान के दफ्तर भी गए और वहां अपनी शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद भी उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि आखिर इलाके में पानी न आने की मुख्य वजह क्या है. लोग लगातार विधायक के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है. स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि पानी की लाइन जोड़ने के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है और धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है, जिससे परेशान होकर अब वे कह रही हैं कि 'क्या लोग पानी के बिना मर जाएंगे, तब सरकार पानी चालू करेगी?'

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