दिल्ली में मानसून से पहले एक्शन मोड में सरकार, 30 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य, नालों की सफाई जारी

दिल्ली सरकार ने मानसून से पहले शहर के 77 बड़े नालों से 30 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा है, जिसका 50% काम पूरा हो चुका है. सरकार का दावा है कि इस व्यापक सफाई अभियान से इस बार दिल्ली को जलभराव की समस्या से मुक्ति मिलेगी.

दिल्ली न्यूज
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सुशांत मेहरा

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राजधानी दिल्ली में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने अभी से कमर कस ली है. दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी (PWD) और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने शहर के बड़े नालों की सफाई (डिसिल्टिंग) का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है. सरकार का दावा है कि इस बार दिल्लीवालों को बारिश में जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी.

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30 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का बड़ा लक्ष्य

दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री ने दिल्ली गेट स्थित ड्रेन का निरीक्षण करते हुए बताया कि दिल्ली में जलभराव का मुख्य कारण दशकों से नालों की गहराई से सफाई न होना है. सरकार ने इस साल 30 लाख मीट्रिक टन सिल्ट (गाद) निकालने का लक्ष्य रखा है. पिछले साल 2025 में यह लक्ष्य 20 लाख मीट्रिक टन था, जिसे इस बार काफी बढ़ा दिया गया है.

50% काम पूरा, मानसून से पहले सभी 77 नाले होंगे साफ

मंत्री ने जानकारी दी कि दिल्ली के सभी 77 बड़े नालों में सफाई का काम तेजी से चल रहा है. 30 मार्च 2026 तक सरकार ने अपने निर्धारित लक्ष्य का 50% हिस्सा पूरा कर लिया है. मानसून आने में अभी करीब ढाई से तीन महीने का समय है, और सरकार का दावा है कि समय सीमा से पहले ही सभी नालों से गाद निकालने का काम पूरा कर लिया जाएगा.

एमसीडी के नाले भी अब पीडब्ल्यूडी के पास

वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, एमसीडी (MCD) के कई नाले जो पहले साफ नहीं हो पा रहे थे, उन्हें भी अब सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को सौंप दिया गया है. विभाग के पास अब नालों की कुल संख्या 77 हो गई है. दिल्ली गेट जैसे व्यस्त इलाकों में कवर्ड नालों को तोड़कर उनसे मशीन के जरिए भारी मात्रा में गाद निकाली जा रही है. निकाली गई गाद को सुखाने के बाद निर्धारित स्थानों पर डंप किया जा रहा है.

सरकार का कहना है कि नालों की स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ने से इस बार बारिश का पानी सड़कों पर जमा नहीं होगा और न ही लोगों के घरों में घुसेगा, जिससे दिल्लीवासी मानसून का आनंद ले सकेंगे.

 

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