देश की राजधानी दिल्ली में हर रोज लाखों लोग सफर करते हैं. अगर बात की जाए कि दिल्ली में सबसे ज्यादा लोग सफर किससे करते हैं, मेट्रो से या डीटीसी (DTC) बसों सेतो इसका जवाब डीटीसी है. दिल्ली में डीटीसी बसों से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यात्रियों की इस बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कई नए रूट्स भी शुरू किए हैं. अब जब यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, तो जाहिर सी बात है कि मैनेजमेंट पर काम का बोझ भी बढ़ रहा है. इसी बढ़ते वर्कलोड को संभालने और दिल्ली की जनता को बसों के सफर में बड़ी राहत देने के लिए डीटीसी अब अपने पूरे बस मैनेजमेंट सिस्टम को हाईटेक करने की तैयारी कर रही है.
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IIT कानपुर की मदद से AI आधारित होगा नया बस सिस्टम
बसों की लेटलतीफी को पूरी तरह से रोकने, रूट्स को बेहतर बनाने और डीटीसी के पूरे कामकाज को डिजिटल करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. डीटीसी अब अपने पूरे मैनेजमेंट सिस्टम को स्मार्ट बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि एआई (AI) का सहारा लेने जा रही है. इस बड़े और हाईटेक प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी. आईआईटी कानपुर के तकनीकी दिमाग और एआई की जुगलबंदी से जब डीटीसी का यह नया डिजिटल और आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम सड़कों पर उतरेगा, तो यकीनन दिल्ली के यात्रियों का सफर बेहद सुगम और समय बचाने वाला हो जाएगा.
पुराने सिस्टम में बड़े बदलाव और नए रूट्स का जाल
डीटीसी इस समय अपने पुराने और पारंपरिक सिस्टम को बदलकर उसमें बड़े रिस्ट्रक्चरिंग बदलाव कर रही है. सरकार पर्यावरण और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अपनी करीब 15 साल पुरानी सीएनजी (CNG) लोड बसों को सड़कों से धीरे-धीरे हटा रही है और उनकी जगह तेजी से आधुनिक इलेक्ट्रिक बसें ला रही है. अगर मौजूदा आंकड़ों की बात करें तो फिलहाल डीटीसी के पास कुल मिलाकर करीब 6300 बसों का एक विशाल बेड़ा है. इस बेड़े में से 4538 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो चुकी हैं, जबकि 10,759 सीएनजी बसें अभी कार्यरत हैं. इसके साथ ही यात्रियों की सहूलियत के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में नए रूट जोड़े गए हैं, जिनमें ईस्ट जोन में 121 रूट, वेस्ट जोन में 181 रूट और नॉर्थ जोन में 194 नए रूट शामिल किए गए हैं.
यात्रियों को मिलेगा रियल-टाइम डेटा, लेटलतीफी होगी खत्म
डीटीसी में सफर करने वाले यात्रियों की आज के समय में सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि उन्हें बसों की सही समय पर सही जानकारी यानी रियल-टाइम डेटा नहीं मिल पाता है. लोग अक्सर बस स्टॉप पर खड़े होकर लंबा इंतजार करते हैं कि उनकी बस कब आएगी. लेकिन इस नए एआई आधारित सिस्टम के लागू होने से न सिर्फ बसों की मॉनिटरिंग बेहद आसान हो जाएगी, बल्कि यात्रियों की यह बड़ी समस्या भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.
इस डिजिटल सिस्टम के जरिए यात्रियों को अपने मोबाइल या स्टॉप पर यह सटीक और रियल-टाइम जानकारी मिल सकेगी कि वह जिस बस का इंतजार कर रहे हैं, वह कितनी देर में उनके स्टॉप पर आने वाली है. इतना ही नहीं, यात्रियों को यह भी पता चल सकेगा कि आने वाली बस में उनके बैठने के लिए सीट खाली है या नहीं. इस बड़े बदलाव के बाद देश की राजधानी का पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से स्मार्ट होने जा रहा है.
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