अगर आप भी देश की राजधानी दिल्ली में रहते हैं और दैनिक आवाजाही के लिए बसों का सफर करते हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगी. अक्सर यात्रियों को बस स्टॉप पर खड़े होकर बसों का लंबा इंतजार करना पड़ता है और यह भी मालूम नहीं होता कि उनकी बस कितनी देर में आएगी. लेकिन अब दिल्ली में बसों का पूरा सिस्टम बदलने जा रहा है. अब मेट्रो की तर्ज पर बस स्टॉप पर खड़े-खड़े ही यात्रियों को पता चल जाएगा कि अगली बस किस रूट की है और वह कितनी देर में उनके पास पहुंचने वाली है. दिल्ली परिवहन निगम (DTC) अब दिल्ली के बस नेटवर्क को पूरी तरह हाईटेक बनाने की तैयारी में जुट गया है.
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डिजिटल बोर्ड और मोबाइल ऐप पर मिलेगी लाइव टाइमिंग
डीटीसी द्वारा तैयार किए जा रहे इस नए सिस्टम के तहत यात्रियों को बसों की लाइव लोकेशन और टाइमिंग की जानकारी कई माध्यमों से मिलेगी. यह सुविधा न सिर्फ यात्रियों के मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी, बल्कि अब दिल्ली के बस स्टॉप्स पर डिजिटल पब्लिक इंफॉर्मेशन बोर्ड भी लगाए जाएंगे. इस पूरी व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए पिछले हफ्ते ही डीटीसी की एक हाई लेवल बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है. इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर उतारने और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए डीटीसी देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी (IIT) कानपुर की मदद लेने जा रहा है.
3500 से अधिक बस स्टॉप्स का होगा कायाकल्प
दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर के लेवल पर भी बहुत बड़ा बदलाव होने वाला है. पूरी दिल्ली में 3500 से अधिक बस स्टॉप्स को पीपीपी (PPP) मॉडल पर नए सिरे से विकसित किया जाएगा. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस कायाकल्प के लिए टेंडर भी जारी किया जा चुका है. सिर्फ लाइव ट्रैकिंग ही नहीं, बल्कि दिल्ली के बस रूट्स को भी बेहतर और सुगम बनाया जा रहा है.
बसों की लाइव ट्रैकिंग सेवा को पूरी तरह शुरू करने से पहले आईआईटी दिल्ली और डीटीआईडीसी (DTIDC) मिलकर एक खास स्टडी कर रहे हैं, ताकि दिल्ली के बस नेटवर्क को डाटा के आधार पर फिर से डिजाइन किया जा सके. वर्तमान में दिल्ली के ईस्ट जोन में 121 रूट, वेस्ट जोन में 181 रूट्स और नॉर्थ जोन में 194 बस रूट्स के रैशनलाइजेशन यानी सुधार पर तेजी से काम चल रहा है.
पिछली नाकामियों से सीखकर सरकार ने बदला गेम प्लान
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि लाइव ट्रैकिंग की कोशिश तो दिल्ली में पहले भी हुई थी, तो फिर इस बार नया क्या है. दरअसल, पिछली बार यह व्यवस्था सिर्फ एनडीएमसी (NDMC) एरिया और कुछ चुनिंदा ऐप्स तक ही सीमित रह गई थी. उस समय डीटीसी और क्लस्टर बसों में लगे जीपीएस (GPS) का रखरखाव ठीक से न होने की वजह से पूरी योजना पटरी से उतर गई थी. लेकिन इस बार सरकार ने अपना पूरा गेम प्लान बदल दिया है. अब दिल्ली में पुरानी क्लस्टर स्कीम को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है और अब सिर्फ डीटीसी के पास ही बसों का परिचालन है.
हाईटेक कमांड सेंटर से होगी पल-पल की निगरानी
नए गेम प्लान के तहत अब दिल्ली की बसें ओपेक्स (OPEX) मॉडल पर चल रही हैं. इसका मतलब यह है कि बसों के रखरखाव से लेकर उनके ऑपरेशन तक की पूरी जिम्मेदारी निजी कंपनियों की होगी. इसके साथ ही डीटीसी ने अपना खुद का एक हाईटेक कमांड कंट्रोल सेंटर तैयार किया है, जहां से हर एक बस की जीपीएस के जरिए पल-पल की निगरानी की जा रही है. इस पूरे सिस्टम में अब आईआईटी कानपुर का टेक्निकल सपोर्ट भी जुड़ने जा रहा है. इन तमाम बदलावों से साफ है कि आने वाले दिनों में दिल्ली की बसों में सफर करना बेहद आसान, सुरक्षित और समय बचाने वाला साबित होगा और यात्रियों को बस स्टॉप्स पर बिना वजह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
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