राजधानी दिल्ली में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और इसी तपती गर्मी के बीच दिल्ली के कई इलाकों से पानी के गंभीर संकट की तस्वीरें सामने आ रही हैं. ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके से सामने आया है, जहां झुग्गी-झोपड़ी के बदले सरकार द्वारा दिए गए बहुमंजिला फ्लैटों में रहने वाले लोग पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं. जिन फ्लैटों को ऊंची-ऊंची चमचमाती इमारतों के रूप में झुग्गीवासियों को अलॉट किया गया था, वहां गर्मी की शुरुआत होते ही बुनियादी सुविधाओं का दम निकलता दिखाई दे रहा है.
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फ्लैटों के नल सूखे, बोरवेल पर लगी डब्बों की लंबी लाइन
गोविंदपुरी के इन सरकारी फ्लैटों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि इमारतों में लगे नलके पूरी तरह सूखे पड़े हैं और उनमें पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंच पा रही है. पानी की इस गंभीर किल्लत के कारण स्थानीय निवासी परिसर में लगे इकलौते बोरवेल से पानी भरने को मजबूर हैं. बोरवेल के पास सुबह से ही प्लास्टिक के डब्बों, बाल्टियों और बर्तनों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं. लोगों का कहना है कि भीषण धूप और गर्मी में अपनी बारी का इंतजार करने के लिए उन्हें रोजाना कई-कई घंटों तक लाइनों में खड़े रहना पड़ता है.
तीन से चार घंटे की मशक्कत के बाद मिल रहा मात्र 20 लीटर पानी
स्थानीय निवासी श्याम मनोहर ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पानी की किल्लत इतनी ज्यादा है कि वे सुबह 3:00 से 4:00 बजे ही पीने का पानी लेने के लिए लाइनों में लग जाते हैं . इसके बाद खारा पानी लेने के लिए उन्हें दूसरी लाइन में करीब तीन घंटे तक खड़ा रहना पड़ता है.
वहीं, अन्य महिलाओं का कहना है कि तीन-चार घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद भी उन्हें मात्र 5-5 लीटर के दो डब्बे या ज्यादा से ज्यादा 10 से 20 लीटर पानी ही नसीब हो पाता है. कई बार तो हालात इतने खराब हो जाते हैं कि रात के समय भी मीठा पानी लेने के लिए तीन-तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है और अंत में लोगों को खाली हाथ या बेहद कम पानी के साथ वापस लौटना पड़ता है.
रिश्तेदारों के घर कपड़े धोने और कोठियों में नहाने को मजबूर लोग
गोविंदपुरी के सी-ब्लॉक (फ्लैट नंबर 9) में रहने वाली एक महिला ने बताया कि पिछले 6 दिनों से उनके घरों में पानी की एक बूंद भी नहीं आई है. इस गंभीर संकट के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह पटरी से उतर गई है. हालत यह हो चुकी है कि लोग नहाने के लिए आसपास की कोठियों में जाने को मजबूर हैं, वहीं पहनने वाले कपड़े धोने के लिए उन्हें अपने रिश्तेदारों के घरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन को इस समस्या की जानकारी है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है.
'इससे अच्छी तो हमारी झुग्गी थी', फ्लैटों के निर्माण पर भी उठे सवाल
पानी की इस किल्लत और बदइंतजामी से परेशान होकर ए-ब्लॉक की दूसरी मंजिल पर रहने वाली एक महिला ने गुस्से में यहां तक कह दिया कि 'इससे अच्छी तो हमारी झुग्गी ही बढ़िया थी, जब से यहां आए
हैं तब से सिर्फ दिक्कतें ही झेल रहे हैं'. इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने इन फ्लैटों के निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. निवासियों का कहना है कि फ्लैटों की दीवारों में इस कदर सीलन आ रही है कि अगर कोई इंसान दीवार पर एक कील भी लगाना चाहे, तो पूरी रेत हाथ में आ जाती है. लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने मकान के नाम पर केवल एक ढांचा खड़ा करके दे दिया है, जिसकी हालत इंसानों के रहने लायक नहीं बल्कि जानवरों को बांधने जैसी लगती है.
राजनीति नहीं, बुनियादी समस्या का समाधान चाहते हैं पीड़ित
जब स्थानीय निवासियों से इस पानी की समस्या को लेकर राजनीतिक दलों (केजरीवाल सरकार बनाम बीजेपी) के बारे में पूछा गया, तो लोगों ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें किसी भी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. उनका कहना है कि पानी की यह समस्या पिछले साल भी थी और इस साल भी बनी हुई है.
चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, उन्हें सिर्फ अपनी बुनियादी समस्या यानी पानी की नियमित सप्लाई से मतलब है, जो कि उन्हें नहीं मिल पा रही है. वर्तमान में हालत यह है कि बहुमंजिला इमारतों के ऊंचे फ्लोर जैसे सातवीं मंजिल पर रहने वाले लोगों के लिए बिना पानी के इस तपती गर्मी को काटना एक बड़ी सजा बन चुका है.
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