अरविंद केजरीवाल समेत 4 लोगों के खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट का मामला दर्ज, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस!

Delhi High Court News: दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास के खिलाफ दायर क्रिमिनल कंटेंप्ट याचिका पर नोटिस जारी किया है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की बेंच ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे पुराने सू-मोटो केस के साथ जोड़ दिया है. जानिए आखिर क्या है पूरा विवाद.

Arvind Kejriwal Contempt Case
Arvind Kejriwal Contempt Case

न्यूज तक डेस्क

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेताओं की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय और एक पत्रकार सौरव दास के खिलाफ दायर की गई आपराधिक अवमानना की नई याचिका को स्वीकार कर लिया है. कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए चारों उत्तरदाताओं को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है. इस मामले की आज हुई सुनवाई में कोर्ट ने साफ किया कि न्याय व्यवस्था की गरिमा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.

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जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की बेंच में हुई सुनवाई

इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिका की मेरिट को देखते हुए इसे एडमिशन स्टेज पर ही स्वीकार कर लिया. अदालत की कार्यवाही के दौरान उत्तरदाता नंबर तीन और चार यानी गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास की तरफ से उपस्थित हुए वकीलों ने कोर्ट का नोटिस स्वीकार कर लिया. हालांकि, सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज की तरफ से कोर्ट में कोई भी कानूनी प्रतिनिधि या वकील उपस्थित नहीं था.

हाईकोर्ट के पुराने सू-मोटो केस के साथ जोड़ी गई नई याचिका

अदालत ने सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए इस नई याचिका को पहले से चल रहे मुख्य मामले के साथ संबद्ध करने का आदेश दिया. दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पूरे विवाद पर पहले ही स्वतः संज्ञान लेते हुए साल 2026 की क्रिमिनल कंटेंप्ट पिटीशन संख्या के तहत एक मामला दर्ज किया हुआ है. चूंकि अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज को उस पुराने सू-मोटो मामले में पहले ही नोटिस तामिल कराया जा चुका है, इसलिए अदालत ने अलग से सुनवाई करने के बजाय इस नई याचिका को भी उसी मुख्य केस के साथ जोड़ दिया है. अब इन सभी मामलों की एक साथ संयुक्त रूप से सुनवाई की जाएगी.

वरिष्ठ अधिवक्ता मिस्टर बेहोरा बने रहेंगे कोर्ट के न्याय मित्र

आपराधिक अवमानना के इस संवेदनशील मामले में अदालत ने कानूनी प्रक्रिया को पूरी निष्पक्षता से आगे बढ़ाने के लिए एक एमिकस क्यूरी की भी मदद ली है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो न्याय मित्र पहले के सू-मोटो मामले में नियुक्त किए गए थे, वही इस नई याचिका की सुनवाई में भी अदालत का सहयोग करेंगे. हाईकोर्ट की सहायता के लिए देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता मिस्टर बेहोरा को इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है, जो आने वाली कड़ियों में अदालत के सामने अपनी कानूनी राय रखेंगे.

जानिए आखिर क्यों दर्ज हुआ क्रिमिनल कंटेंप्ट का यह मामला?

याचिकाकर्ता के मुताबिक, यह पूरा विवाद दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस स्वकांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर शुरू किए गए एक सुनियोजित और साझा हमले से जुड़ा हुआ है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने शुरुआत में कुल पांच लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया था. इसके बाद, दिल्ली सरकार के क्रिमिनल स्टैंडिंग काउंसिल से जरूरी सहमति मांगी गई. सहमति मिलने के बाद, एक व्यक्ति को छोड़कर बाकी चार लोगों अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास के खिलाफ कोर्ट में यह आधिकारिक याचिका दाखिल की गई.

आगामी 4 अगस्त को होगी मामले की अगली बड़ी सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले को अब अगस्त महीने के लिए टाल दिया है. अदालत ने इस मामले की अगली संयुक्त सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है. दिलचस्प बात यह है कि हाईकोर्ट के पुराने सू-मोटो अवमानना मामले के लिए भी पहले से 4 अगस्त की ही तारीख तय थी. इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों मामलों को एक साथ जोड़कर 4 अगस्त को पेश करने का निर्देश दिया है, जहां आम आदमी पार्टी के इन दिग्गज नेताओं को कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखना होगा.

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