प्रदर्शनकारियों की रिकॉर्डिंग क्यों? जंतर-मंतर CCTV विवाद पर हाई कोर्ट में सवाल

न्यूज तक डेस्क

• 10:08 AM • 25 Jul 2026

जंतर-मंतर पर CJP और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान CCTV और अन्य कैमरों से निगरानी का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों की निजता और डेटा सुरक्षा पर सवाल उठाए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा। अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान CCTV और अन्य कैमरों से निगरानी का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर शुक्रवार को सुनवाई हुई. अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

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प्रदर्शनकारियों की रिकॉर्डिंग पर उठे सवाल

याचिका में जंतर-मंतर पर CCTV और अन्य कैमरों से प्रदर्शनकारियों की निगरानी पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल युवाओं और छात्रों की गतिविधियों को इस तरह रिकॉर्ड करना निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं पैदा करता है.

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने अदालत में पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के अधिकारों को आपराधिक गतिविधियों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

360 डिग्री कैमरों से निगरानी का आरोप

नंदिता राव ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर CCTV के साथ 360 डिग्री कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इनके जरिए छात्रों के पहनावे और बातचीत सहित दूसरी गतिविधियां रिकॉर्ड की जा रही हैं.

उन्होंने अदालत के सामने सवाल उठाया कि इस तरह की निगरानी का उद्देश्य क्या है? साथ ही यह भी पूछा कि प्रदर्शनकारियों की रिकॉर्ड की गई तस्वीरों और वीडियो का आगे किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा.

निजी मोबाइल से वीडियो बनाने का भी दावा

सुनवाई के दौरान नंदिता राव ने एक और मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग खुद को पुलिस अधिकारी बता रहे हैं, लेकिन वे वर्दी में नहीं हैं. आरोप है कि ऐसे लोग निजी मोबाइल फोन से भी प्रदर्शनकारियों की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं. याचिकाकर्ताओं ने इसे युवाओं की निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है.

केंद्र की तरफ से रखी गई दलील

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि अगर सरकारी रिकॉर्डिंग पर सवाल उठाया जा रहा है तो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की ओर से की जा रही वीडियोग्राफी पर भी विचार होना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में मौजूद युवा भी वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं. ऐसे में उनकी रिकॉर्डिंग को लेकर भी सवाल उठने चाहिए.

इस दलील पर नंदिता राव ने कहा कि राज्य और एक सामान्य नागरिक की भूमिका और जिम्मेदारी अलग-अलग होती है.

सोमवार को फिर होगी सुनवाई

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. अब इस मामले पर सोमवार को अगली सुनवाई होगी. ऐसे में अदालत में केंद्र की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी.