दिल्ली की सियासत और बहुचर्चित शराब नीति मामले में आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज दोपहर 2:30 बजे दिल्ली हाई कोर्ट में खुद अपनी दलीलों के साथ पेश होंगे. केजरीवाल ने फैसला किया है कि वह इस मामले में किसी वकील के बजाय खुद बहस करेंगे. मामला केवल कानूनी नहीं है, बल्कि अब 'जज' को बदलने की मांग पर आकर टिक गया है.
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क्यों जज बदलना चाहते हैं केजरीवाल और AAP नेता?
अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और विजय नायर जैसे दिग्गज नेताओं ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने सुनवाई पर आपत्ति जताई है. आम आदमी पार्टी (AAP) खेमे का तर्क है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा हाल ही में 'अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद' के एक सेमिनार में शामिल हुई थीं, जो कि आरएसएस (RSS) समर्थित संगठन माना जाता है. केजरीवाल खेमे को आशंका है कि इस वजह से उन्हें निष्पक्ष न्याय नहीं मिल पाएगा.
सीबीआई का पलटवार: "यह फोरम शॉपिंग है"
जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने केजरीवाल की इस मांग का कड़ा विरोध किया है. सीबीआई ने इसे 'फोरम शॉपिंग' यानी अपनी पसंद की अदालत चुनने की कोशिश करार दिया है. एजेंसी का कहना है कि किसी कानूनी सेमिनार में हिस्सा लेने मात्र से किसी न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल उठाना गलत और बेबुनियाद है. सीबीआई ने इन आरोपों को मनमाना और बेईमान बताया है.
क्या था लोअर कोर्ट का फैसला?
इस पूरे मामले में मोड़ तब आया जब 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई के केस को अविश्वसनीय बताते हुए सभी को बरी कर दिया था. हालांकि, जब सीबीआई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया था. यहीं से आम आदमी पार्टी की चिंताएं बढ़ गईं और उन्होंने बेंच बदलने की मांग शुरू कर दी.
आज क्या होगा?
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सुनवाई से अलग होना है या नहीं, इसका निर्णय पूरी तरह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के विवेक पर निर्भर करता है. आज दोपहर 2:30 बजे यह तय हो जाएगा कि जस्टिस शर्मा खुद को इस केस से अलग करती हैं या फिर केजरीवाल की अर्जी को खारिज कर सुनवाई जारी रखती हैं.
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