मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे तनाव और युद्ध के हालातों का असर अब राजधानी दिल्ली की रसोई तक पहुंच गया है. गैस एजेंसियों के बाहर लग रही लंबी कतारों और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत के बीच रेखा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. दिल्ली में व्यावसायिक संस्थानों के लिए नई वितरण नीति (New Distribution Policy) लागू कर दी गई है, जिसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए कोटा निर्धारित किया गया है.
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किसे कितना मिलेगा कोटा?
सरकार ने व्यावसायिक संस्थानों को 8 श्रेणियों में बांटकर सिलेंडरों का कोटा तय किया है.
- रेस्टोरेंट और भोजनालय: सबसे ज्यादा 42% (762 सिलेंडर) का कोटा.
- सरकारी संस्थान और कैंटीन: 13% (236 सिलेंडर).
- अस्पताल, शिक्षण संस्थान और रेलवे: 11% (200 सिलेंडर).
- डेयरी, बेकरी और हलवाई की दुकान: 11% (200 सिलेंडर).
- कैटरर्स और बैंकवेट हॉल: 9% (162 सिलेंडर).
- खेल परिसर और स्टेडियम: 8% (150 सिलेंडर).
- होटल और गेस्ट हाउस: 4% (72 सिलेंडर).
- ड्राई क्लीनिंग और फार्मा यूनिट्स: 1% (18 सिलेंडर).
कालाबाजारी करने वालों की खैर नहीं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चेतावनी दी है कि संकट की इस घड़ी में सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके लिए खाद्य आपूर्ति विभाग, दिल्ली पुलिस और विधिक माप विज्ञान विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया है. दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे.
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