मालवीय नगर अग्निकांड के बाद साकेत के मैक्स अस्पताल में चीख-पुकार, अपनों को ढूंढने भटक रहे बदहवास परिजन

Delhi Fire Tragedy: दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बाद साकेत के मैक्स अस्पताल में दर्द और अफरा-तफरी का माहौल है. 21 लोगों की मौत की पुष्टि के बीच परिजन अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं. कई परिवारों ने अपने सदस्यों को खो दिया, जबकि कुछ लोग अब भी लापता हैं. पढ़ें मैक्स अस्पताल से ग्राउंड रिपोर्ट, पीड़ित परिवारों की आपबीती और हादसे से जुड़ी पूरी कहानी.

Delhi Fire Tragedy
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न्यूज तक डेस्क

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दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है. इस दर्दनाक हादसे में दिल्ली पुलिस की ओर से अब तक 21 लोगों की मौत होने की आधिकारिक पुष्टि की जा चुकी है. इस अग्निकांड के बाद साकेत के मैक्स अस्पताल में बेहद गंभीर और पैनिक की स्थिति बनी हुई है. अस्पताल परिसर में हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजनों की भारी भीड़ जमा है, जहां चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और अपनों को खोने का मातम पसरा हुआ है. हादसे में मारे गए लोगों के शव और कई घायल मरीजों को इसी अस्पताल में लाया गया है.

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अस्पताल और रेस्क्यू टीम की लापरवाही से परेशान दिखे परिजन

हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन अस्पताल प्रशासन और रेस्क्यू टीम के रवैये ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है. परिजनों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल में उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है और न ही उन्हें सही जानकारी दी जा रही है. कौन सा मरीज किस वार्ड या आईसीयू में भर्ती है और किसकी जान जा चुकी है, इसे लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है.

पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें एक जगह से दूसरी जगह भगाया जा रहा है और कोई भी रेस्क्यू टीम उनकी मदद करने के लिए आगे नहीं आ रही है. अपनों की एक झलक पाने और उनकी खैरियत जानने के लिए लोग अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

इलाज कराने आए बुजुर्ग के पूरे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

इस भीषण अग्निकांड में कई ऐसे परिवार हैं जो पूरी तरह खत्म हो गए. अस्पताल में मौजूद एक पीड़ित परिवार ने बताया कि उनके बुजुर्ग पिता बीमार थे, जिनका इलाज कराने के लिए पूरा परिवार आया हुआ था. बुजुर्ग मरीज के बेटे विवेक अग्रवाल (उम्र करीब 45 वर्ष) गुड़गांव में रहते थे, लेकिन बार-बार अस्पताल आने-जाने की परेशानी से बचने के लिए उन्होंने अस्पताल के ठीक सामने स्थित बिल्डिंग के एक होटल नुमा कमरे में पूरा परिवार ठहराया हुआ था. हादसे की रात ही कुछ अन्य रिश्तेदार भी बाहर से आए थे, जिन्होंने सुबह घर लौटने की बात कहकर रात वहीं रुकने का फैसला किया था, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि रात में मौत का ऐसा तांडव देखने को मिलेगा.

एक ही परिवार के कई लोगों की मौत, तीन लड़कियां अब भी लापता

अस्पताल में रोते-बिलखते बुजुर्ग ने बताया कि उनके परिवार के कुल आठ लोग उस बिल्डिंग में मौजूद थे, जिनमें से छह लोगों की मौत हो चुकी है और दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं. मृतकों में विवेक अग्रवाल (45 वर्ष), उनकी मां प्रेमलता अग्रवाल (65-70 वर्ष), विवेक की पत्नी तर्जनी अग्रवाल (42 वर्ष) और उनकी 20 वर्षीय बड़ी बेटी एंजेल अग्रवाल शामिल हैं. 

वहीं, परिवार की 17 वर्षीय छोटी बेटी समेत तीन लोग अभी भी लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है. पीड़ितों का कहना है कि हादसे की सुबह करीब 8:30 बजे तक उनकी अपनी बेटी से फोन पर बात हुई थी और सब कुछ ठीक था, लेकिन कुछ ही देर बाद पुलिस का फोन आया कि मौके से उनके परिवार के 4 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं और अब कोई भी फोन उठाने वाला नहीं बचा है.

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दिल्ली के मालवीय नगर में रेस्टोरेंट में भीषण आग, 21 लोगों की मौत 37 को किया गया रेस्क्यू

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