देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने वाली हैं. दिल्ली के मौजूदा मेयर का कार्यकाल खत्म होने वाला है और नए मेयर के चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है और अगले महीने यानी मई में दिल्ली को नया मेयर मिल जाएगा.
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बहुमत का जादुई आंकड़ा: 137
- दिल्ली मेयर चुनाव में वोटिंग का गणित थोड़ा अलग होता है. यहाँ केवल पार्षद ही नहीं, बल्कि सांसद और विधायक भी वोट डालते हैं.
- कुल वोट: 273 (249 पार्षद + 14 मनोनीत विधायक + 7 लोकसभा सांसद + 3 राज्यसभा सांसद)
- बहुमत के लिए जरूरी: 137 वोट
- किसके पास कितनी ताकत? (आंकड़ों की जुबानी)
भारतीय जनता पार्टी (BJP):
बीजेपी फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रही है.
पार्षद: 123
लोकसभा सांसद: 07
मनोनीत विधायक: 11
कुल वोट: 141 (बहुमत से 4 ज्यादा)
आम आदमी पार्टी (AAP):
आम आदमी पार्टी बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे दिख रही है.
पार्षद: 100
राज्यसभा सांसद: 03
मनोनीत विधायक: 03
कुल वोट: 106
क्या उलटफेर की कोई गुंजाइश है?
आम आदमी पार्टी को अपना मेयर बनाने के लिए कम से कम 31 और वोटों की जरूरत होगी. यदि 'आप' को कांग्रेस (9 पार्षद), इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (15 पार्षद), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (1 पार्षद) और निर्दलीय (1 पार्षद) का समर्थन मिल भी जाए, तब भी उनका आंकड़ा 132 तक ही पहुँचता है. यानी बहुमत (137) के लिए उन्हें फिर भी 5 वोटों की दरकार होगी, जो बिना बीजेपी के पार्षदों की क्रॉस वोटिंग के मुमकिन नहीं है.
दिल्ली सरकार बदलने का असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में सत्ता परिवर्तन (आम आदमी पार्टी की हार और बीजेपी की जीत) के बाद एमसीडी के समीकरण भी बदल गए हैं. 2022 में भले ही 'आप' ने बहुमत के साथ मेयर बनाया था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और आंकड़ों को देखते हुए इस बार बीजेपी का पलड़ा भारी लग रहा है.
अब देखना यह होगा कि क्या आम आदमी पार्टी इस चुनाव में हिस्सा लेती है या पिछले साल की तरह दूरी बनाए रखती है. साथ ही, क्या कोई 'सीक्रेट रणनीति' खेल को बदल पाएगी?
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