दिल्ली मेट्रो को राजधानी की लाइफलाइन कहा जाता है, जहां हर रोज लाखों यात्री सुरक्षित सफर की उम्मीद के साथ कदम रखते हैं. लेकिन क्या हो जब सुरक्षा देने वाली खाकी वर्दी ही आम नागरिकों की परेशानी और मानसिक उत्पीड़न का सबब बन जाए? दिल्ली हाट मेट्रो स्टेशन (Dilli Haat Metro Station) से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कपल ने दिल्ली पुलिस के एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) पर बदसलूकी और उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया है. यह मामला अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरी घटना यशवंत परिहार नाम के एक यात्री के साथ घटी, जिन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर अपनी आपबीती साझा की है. पीड़ित यशवंत के मुताबिक, वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ दिल्ली हाट मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर अगली मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रहे थे. इसी दौरान वहां तैनात दिल्ली पुलिस के एक एएसआई (ASI) ने उन्हें लगातार घूरना शुरू कर दिया.
आरोप है कि कुछ देर बाद वह एएसआई उनके पास आया और दोनों को अलग-अलग खड़ा कर दिया. इसके बाद उसने सार्वजनिक रूप से सबके सामने उन पर तीखे सवालों की बौछार कर दी- जैसे "कहाँ से आए हो?", "कहाँ जा रहे हो?" और "यहाँ क्या कर रहे हो?".
हमने एक-दूसरे का हाथ तक नहीं पकड़ा था
यात्री यशवंत परिहार का दावा है कि मेट्रो स्टेशन पर उनकी मौजूदगी के दौरान ऐसा कुछ भी गलत नहीं था जो कानून या मर्यादा के खिलाफ हो. उन्होंने यहां तक कहा कि उन्होंने एक-दूसरे का हाथ तक नहीं पकड़ा हुआ था, फिर भी पुलिसकर्मी ने उनके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव किया और उन्हें अपमानित किया.
राजीव चौक पुलिस बूथ से मिला हैरान करने वाला तर्क
परेशान कपल ने जब इस बदसलूकी के खिलाफ राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर बने पुलिस बूथ पर जाकर शिकायत दर्ज कराई, तो वहां तैनात अधिकारियों से जो जवाब मिला वह और भी हैरान करने वाला था. शिकायत सुनने के बाद पुलिस अधिकारी ने मामले को रफा-दफा करने के अंदाज में कहा-"इसे ऐसे मान लो जैसे माता-पिता ने डांट दिया हो." इसके साथ ही पुलिस बूथ पर यह अजीबोगरीब तर्क भी दिया गया कि हो सकता है उस एएसआई को कोई 'इंटेलिजेंस इनपुट' मिला हो, इसलिए उसने पूछताछ की.
पीड़ित यात्री ने पुलिस के इस रवैये पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह कोई रूटीन सुरक्षा जांच (Routine Security Check) थी तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन सुरक्षा जांच और उत्पीड़न (Harassment) के बीच की बारीक रेखा को पुलिस को समझना होगा.
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
यह पोस्ट रेडिट (Reddit) और एक्स (X) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने के बाद यूजर्स दिल्ली पुलिस के प्रति भारी नाराजगी जता रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि खाकी वर्दी पहन लेने से किसी को भी आम नागरिकों को सरेआम अपमानित करने का अधिकार नहीं मिल जाता. कई लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि मेट्रो स्टेशनों पर तैनात पुलिसकर्मियों को अनिवार्य रूप से 'बॉडी कैम' (Body Cam) पहनाया जाना चाहिए ताकि उनकी हर गतिविधि रिकॉर्ड हो सके और भविष्य में ऐसी बदसलूकी पर लगाम लगे.
फिलहाल इस पूरे विवाद पर दिल्ली पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन इस घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर यात्रियों की प्राइवेसी और उनके सम्मान की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है.
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