दिल्ली मेट्रो फेज-4: साल 2026 में बदल जाएगी राजधानी की रफ्तार, इन 6 अहम लाइनों पर शुरू होगी मेट्रो, देखें पूरी लिस्ट

दिल्ली मेट्रो फेज-4 के 6 प्राथमिक कॉरिडोर का 80% काम पूरा हो चुका है और साल 2026 तक इन्हें शुरू करने का लक्ष्य है. इससे एरोसिटी, साकेत और बाहरी दिल्ली के लाखों यात्रियों का सफर आसान और प्रदूषण मुक्त होगा.

Delhi Metro
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वैशाली

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दिल्ली की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) अब एक नए और बड़े विस्तार के लिए तैयार है. अगर आप दिल्ली के ट्रैफिक से जूझते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. साल 2026 राजधानी के ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित होने वाला है. दिल्ली सरकार और डीएमआरसी (DMRC) ने इस साल मेट्रो के फेज-4 के छह महत्वपूर्ण कॉरिडोर को पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

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80% काम पूरा, प्रदूषण पर लगेगा लगाम

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में मेट्रो और सड़क परियोजनाओं की समीक्षा की है. समीक्षा में सामने आया है कि फेज-4 के प्राथमिक कॉरिडोर का करीब 80% काम पूरा हो चुका है. सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक परिवहन के जरिए दिल्ली के प्रदूषण को कम करना और कनेक्टिविटी को वर्ल्ड क्लास बनाना है. दिल्ली मेट्रो फिलहाल 416 किलोमीटर लंबे नेटवर्क और 303 स्टेशनों के साथ देश की सबसे बड़ी मेट्रो प्रणाली है.

इन 6 रूटों पर इसी साल खत्म होगा इंतजार

फेज-4 के तहत जिन 6 सेक्शन पर काम पूरा होने की उम्मीद है, वे निम्नलिखित हैं:

  • कृष्णा पार्क एक्सटेंशन से दीपाली चौक: यह लगभग 6.6 किलोमीटर लंबा स्ट्रेच है.
  • मजलिस पार्क से डेरावल नगर: मन्जिल पार्क लाइन का विस्तार.
  • डेरावल नगर से आर.के. आश्रम: करीब 7.5 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर.
  • तुगलकाबाद से संगम विहार: लगभग 6.5 किलोमीटर का स्ट्रेच.
  • संगम विहार से साकेत जी-ब्लॉक: करीब 6.5 किलोमीटर का कॉरिडोर.
  • साकेत जी-ब्लॉक से एरोसिटी: यह 12.6 किलोमीटर लंबा सबसे बड़ा सेक्शन है.

2029 तक का मास्टर प्लान

इन 6 कॉरिडोर के अलावा, तीन और नए रास्तों पर काम शुरू हो चुका है, जिन्हें साल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है:

  • लाजपत नगर से साकेत
  • इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ

फ्लाईओवर और डबल डेकर का जाल

मेट्रो के साथ-साथ दिल्ली में फ्लाईओवर परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है. आजादपुर से त्रिपुलिया चौक तक बन रहा डबल डेकर फ्लाईओवर और यमुना विहार से भजनपुरा कॉरिडोर का काम भी अपने अंतिम चरण में है. इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से बाहरी और दक्षिणी दिल्ली की दूरी कम हो जाएगी और यमुना पार के लोगों का सफर बेहद आसान हो जाएगा.

सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम होने से प्रदूषण में गिरावट आएगी और दिल्ली रफ्तार के एक नए युग में कदम रखेगी.


 

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