देश की राजधानी दिल्ली की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो एक बार फिर विवादों में है. दिल्ली मेट्रो को लोग सुरक्षित और सुगम सफर के लिए पसंद करते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आया एक मामला इसकी सुरक्षा और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मेट्रो स्टाफ और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान एक आम यात्री के साथ बहस और बदतमीजी करते हुए नजर आ रहे हैं. पीड़ित यात्री का दावा है कि उसे सिर्फ इसलिए हिरासत (डिटेन) में ले लिया गया क्योंकि उसने मेट्रो प्रशासन से एक तकनीकी खराबी की शिकायत की थी.
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरी घटना दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन की है, जहां एक यात्री अपना सफर पूरा करके बाहर निकल रहा था. चेक-आउट के दौरान यात्री के ई-टिकट (या टोकन) से पैसे तो कट गए, लेकिन तकनीकी खामी की वजह से मेट्रो का ऑटोमेटिक एग्जिट गेट नहीं खुला. जब गेट नहीं खुला, तो यात्री ने सोचा कि यह कोई तकनीकी समस्या होगी. इसके समाधान के लिए वह एग्जिट गेट के पास ही बने कस्टमर केयर काउंटर पर गया. यात्री को उम्मीद थी कि मेट्रो स्टाफ उसकी मदद करेगा, लेकिन वहां स्थिति बिल्कुल उलट हो गई.
मदद के बजाय मेट्रो स्टाफ की दादागिरी
कस्टमर केयर काउंटर पर तैनात मेट्रो स्टाफ ने यात्री की तकनीकी समस्या को दूर करने या उसकी बात सुनने के बजाय उल्टा उससे बहस करना शुरू कर दिया. बात देखते ही देखते इतनी बढ़ गई कि मेट्रो स्टाफ और स्टेशन इंचार्ज उस अकेले यात्री पर हावी होने लगे. हद तो तब हो गई जब स्टेशन इंचार्ज ने अपनी गलती सुधारने या यात्री की मदद करने के बजाय वहां तैनात सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ (CISF) के जवानों को बुला लिया. स्टेशन इंचार्ज के कहने पर सीआईएसएफ के जवानों ने उस यात्री को तुरंत हिरासत में ले लिया.
वीडियो में कैद हुई बदतमीजी
इस पूरी घटना का सबसे राहत देने वाला पहलू यह रहा कि पीड़ित यात्री ने मेट्रो स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों की इस दादागिरी को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया. वीडियो में मेट्रो स्टाफ को यात्री से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 'वीडियो बनाने से कुछ नहीं होगा, कुछ भी कर लो, वीडियो बनाने से थोड़ी कुछ होता है.' स्टाफ लगातार यात्री को साइड हटने और दोबारा रिचार्ज करने की बात कह रहा था, जबकि यात्री का कहना था कि उसके पैसे पहले ही कट चुके हैं और जब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं होगा, वह वहां से नहीं हटेगा. यदि यात्री ने यह वीडियो रिकॉर्ड न किया होता, तो शायद पूरी गलती यात्री के सिर ही मढ़ दी जाती.
सुरक्षा व्यवस्था और व्यवहार पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस वीडियो के वायरल होने के बाद दिल्ली मेट्रो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह है कि क्या दिल्ली मेट्रो का स्टाफ यात्रियों की मदद के लिए है या फिर उनके साथ दादागिरी दिखाने के लिए? अगर किसी तकनीकी खराबी के कारण यात्री के पैसे कट जाते हैं और गेट नहीं खुलता, तो क्या उसे अपराधी की तरह डिटेन कर लिया जाएगा? इस घटना ने दिल्ली मेट्रो के उस भरोसे को हिलाकर रख दिया है, जिसके लिए लोग इसे एक सुरक्षित और बेहतर राइड का जरिया मानते थे. अब देखना यह होगा कि इस वायरल वीडियो पर दिल्ली मेट्रो प्रशासन क्या कार्रवाई करता है.
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