दिल्ली-NCR में रहने वाले और रोजाना दिल्ली के बॉर्डर्स पार करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बेहद जरूरी और बड़ी खबर है. राजधानी दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण सीजन की शुरुआत होने से पहले दिल्ली के प्रमुख 20 बॉर्डर टोल प्लाजा पूरी तरह से बैरियर मुक्त होने जा रहे हैं. इसका मतलब यह है कि अब कमर्शियल वाहनों को टोल टैक्स चुकाने के लिए बॉर्डर पर गाड़ी रोकने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी.
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हालांकि, MCD ने इस बड़ी सुविधा के साथ नियमों को भी बेहद सख्त कर दिया है. अगर किसी ने बैरियर मुक्त टोल का फायदा उठाकर टोल नहीं चुकाया या उसके अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस नहीं हुआ, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ गाड़ी जब्त भी की जा सकती है. एमसीडी सदन ने इस कड़े प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है.
जानिए कैसे काम करेगा यह नया हाईटेक सिस्टम
एमसीडी की योजना के मुताबिक अब दिल्ली के इन सभी प्रमुख टोल नाकों से भौतिक बैरियर पूरी तरह हटा दिए जाएंगे. इन जगहों पर हाई डेफिनेशन एएनपीआर (ANPR) कैमरे और विशेष सेंसर लगाए जाएंगे. जैसे ही कोई कमर्शियल वाहन इस नाके से गुजरेगा, ये कैमरे तुरंत गाड़ी की नंबर प्लेट और फास्टैग (Fastag) को स्कैन कर लेंगे. इसके बाद टोल की राशि सीधे आरएफआईडी (RFID) टैग खाते से अपने आप कट जाएगी और वाहन बिना रुके अपनी सामान्य स्पीड में आगे बढ़ सकेंगे.
नियम तोड़ने पर 5 गुना जुर्माना और गाड़ी होगी जब्त
इस नए सिस्टम में सुविधा के साथ-साथ लापरवाही बरतने वालों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं. अगर किसी वाहन के टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं हुआ और उसने टोल नाका पार कर लिया, तो वाहन मालिक को तुरंत एक ई-नोटिस और चालान भेजा जाएगा. नए नियमों के मुताबिक, अगर वाहन मालिक ने इस ई-नोटिस या चालान के मिलने के 72 घंटे के भीतर टोल राशि और चालान का भुगतान नहीं किया, तो एमसीडी को उस गाड़ी को जब्त करने और पांच गुना तक जुर्माना लगाने का पूरा कानूनी अधिकार होगा.
टेंडर प्रक्रिया तेज, अक्टूबर से पहले लागू करने का लक्ष्य
इस नई हाईटेक प्रणाली को जमीन पर उतारने के लिए एमसीडी ने ठेका देने की प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया है. आने वाले 30 जून तक इस कार्य के लिए बोली यानी टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की पूरी संभावना है. जो भी नया ठेकेदार आएगा, वह अगले 5 सालों के लिए दिल्ली के सभी 154 टोल प्लाजा पोस्ट और बैरियर्स का संचालन व अपग्रेडेशन का जिम्मा संभालेगा. इस पूरे कॉन्ट्रैक्ट का सालाना आरक्षित मूल्य 910 करोड़ रुपये तय किया गया है. अधिकारियों का लक्ष्य है कि इस साल अक्टूबर महीने से पहले, यानी सर्दियों का प्रदूषण बढ़ने से ठीक पहले, दिल्ली के 20 सबसे प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर इसे लागू कर दिया जाए.
इन 20 प्रमुख बॉर्डर्स पर हटने जा रहे हैं बैरियर
इस नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के जिन 20 सबसे व्यस्त और प्रमुख बॉर्डर्स को शामिल किया गया है, उनमें कुंडली, रजोकरी, टिकरी, आया नगर, कालिंदी कुंज, कापरसेड़ा, शाहदरा, गाजीपुर, डीएनडी फ्लाईओवर, बदरपुर, फरीदाबाद, सीमापुरी, लोनी, सोनिया विहार, सिरहौल और बिजवासन जैसे मुख्य एंट्री पॉइंट्स शामिल हैं. इन बॉर्डर्स से रोजाना लाखों की संख्या में वाहन दिल्ली में प्रवेश करते हैं.
आखिर क्यों पड़ी इस नए सिस्टम की जरूरत?
दरअसल, दिल्ली की सीमाओं पर कमर्शियल गाड़ियों से टोल और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) की वसूली के चक्कर में सालों से भयंकर ट्रैफिक जाम लगता आ रहा है. सरकार ने इससे पहले करोड़ों रुपये खर्च करके आरएफआईडी सिस्टम भी लागू किया था, लेकिन इसके बावजूद जाम और उससे होने वाले प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी. गाड़ियां घंटों बॉर्डर्स पर खड़ी रहती हैं, जिससे निकलने वाले धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है.
एमसीडी का मानना है कि इस नए बैरियर मुक्त सिस्टम के आने से टोल वसूली बिजली की रफ्तार से होगी, जिससे न तो दिल्ली की सीमाओं पर जाम लगेगा और न ही गाड़ियों के धुएं से प्रदूषण बढ़ेगा. दिल्ली सरकार द्वारा इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद ये नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे.
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