राजधानी दिल्ली में एक तरफ जहां त्योहारी सीजन (दिवाली) के चलते चारों तरफ रौनक होनी चाहिए थी, वहीं दूसरी तरफ मुख्य व्यापारिक केंद्रों में उदासी और सन्नाटा पसरा हुआ है. चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, नबी करीम और कश्मीरी गेट जैसे घने व्यापारिक इलाकों के व्यापारी आए दिन होने वाले धरना-प्रदर्शनों, राजनीतिक रैलियों और पुलिस की ओर से की जाने वाली बैरिकेडिंग व रूट डायवर्जन से बुरी तरह त्रस्त आ चुके हैं. जंतर-मंतर के बाद अब रामलीला मैदान में होने वाली रैलियों को लेकर व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है.
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व्यापारियों का दर्द: 'पूरा साल करते हैं दिवाली का इंतजार, पर मिला सन्नाटा'
व्यापारिक संघ (प्रकाश एनसाइक्लो व अन्य बाजार एसोसिएशन) के प्रतिनिधियों ने कैमरे पर अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग पूरा साल इस उम्मीद में बैठा रहता है कि दिवाली के त्योहारी सीजन में अच्छा कारोबार होगा और वे दो पैसे कमा सकेंगे. लेकिन पिछले दो महीनों से लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने उनकी कमर तोड़ दी है. व्यापारियों का सवाल है कि आखिर इस तरह के राजनीतिक आयोजन और रैलियां दिवाली के ठीक पहले ही क्यों आयोजित की जा रही हैं?
करोड़ों का नुकसान और लाखों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट
व्यापारियों के अनुसार, सिर्फ चांदनी चौक और आसपास के वॉक-इन मार्केट्स में लगभग 2 लाख से ढाई लाख दुकानें स्थित हैं. इनसे न केवल दुकानदार बल्कि करीब 5 लाख कर्मचारी, ट्रांसपोर्टर्स, ठेला-रिक्शा चालक और रेहड़ी-पटरी वाले भी सीधे जुड़े हुए हैं, जिससे कुल मिलाकर लगभग 10 लाख से अधिक परिवारों का जीवन प्रभावित हो रहा है. जब भी रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर कोई बड़ी रैली या प्रदर्शन होता है, तो सुरक्षा कारणों से मुख्य सड़कें, चौराहे और कई बार मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए जाते हैं. इससे बाहर के राज्यों या दूर-दराज से आने वाला व्यापारी और खरीदार पैसा लेकर बाजारों तक पहुंचने में असमर्थ हो जाता है, जिससे रोजाना हजारों करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया जा रहा है.
'सेंट्रल दिल्ली के बजाय बुरारी या बॉर्डर पर हों प्रदर्शन'
व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हैं. लेकिन देश के सबसे बड़े कमर्शियल हब यानी सेंट्रल दिल्ली को पूरी तरह ब्लॉक कर देना कहीं से भी जायज नहीं है. उन्होंने भारत सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट से पुरजोर संज्ञान लेने और अपील की है कि सेंट्रल दिल्ली के घने व्यापारिक इलाकों में धरने-प्रदर्शनों की अनुमति न दी जाए. ऐसे आयोजनों को शहर के बाहर जैसे बुरारी मैदान या बॉर्डर इलाकों (कुंडली बॉर्डर आदि) में शिफ्ट किया जाना चाहिए ताकि आम जनता और व्यापारी राहत की सांस ले सकें.
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