राजधानी दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में DDA की बुलडोजर कार्रवाई से भारी हड़कंप मच गया है. यहां रहने वाले गरीब और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के अचानक बेघर कर दिया गया. जब लोग अपने रोजमर्रा के काम और मजदूरी के लिए घरों से बाहर गए हुए थे, तभी पीछे से भारी पुलिस बल के साथ डीडीए के अधिकारी बुलडोजर लेकर पहुंचे और मकानों को जमींदोज करना शुरू कर दिया. इस अचानक हुई कार्रवाई के कारण प्रभावित लोगों को अपने घरों का सामान तक निकालने का मौका नहीं मिला, जिससे उनका घरेलू सामान मलबे के नीचे दबकर नष्ट हो गया.
ADVERTISEMENT
काम पर गए थे लोग, पीछे से उजाड़ दिए आशियाने
सैदुलाजाब में पिछले 10 से 12 वर्षों से रह रही शकुंतला नाम की महिला ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया. उन्होंने बताया कि परिवार के सभी लोग सुबह मेहनत-मजदूरी के लिए काम पर गए हुए थे और घर पर केवल छोटे-छोटे बच्चे मौजूद थे. पड़ोसियों ने फोन करके घटना की जानकारी दी, जिसके बाद वे लोग भागते हुए मौके पर पहुंचे. महिला का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें घर का कीमती सामान तक उठाने की मोहलत नहीं दी और अब उनका सारा सामान खुले आसमान के नीचे सड़क पर पड़ा हुआ है. लोगों का कहना है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया था और न ही कोई चेतावनी दी गई थी.
अधिकारियों की मिलीभगत और किराए का खेल
कार्रवाई का शिकार हुए एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वे किसी काम से बाहर गए हुए थे और जब ड्यूटी से लौटे तो देखा कि उनका घर टूट चुका था और सारा सामान मलबे में दबा हुआ था. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पहले इन मकानों को बचाने के नाम पर 5 से 7 हजार रुपये लिए जाते थे. यहां तक कि कार्रवाई के समय भी कुछ लोग 6000 रुपए किराए की मांग कर रहे थे. पीड़ितों का कहना है कि वे परदेशी लोग हैं, जो यहां मेहनत-मजदूरी कर अपना गुजारा कर रहे थे, लेकिन इस दमनकारी कार्रवाई के बाद अब उनके सामने रहने का कोई ठिकाना नहीं बचा है.
कोर्ट में सुनवाई के बीच आनन-फानन में कार्रवाई
स्थानीय निवासियों का पक्ष रखते हुए एक व्यक्ति ने डीडीए के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि यह आबादी 100 साल से भी अधिक पुरानी है और रिकॉर्ड के अनुसार यह प्राइवेट जमीन है, जो 2007 से पहले की बनी होने के कारण सरकार द्वारा सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर दोपहर करीब 12:00 बजे हाई कोर्ट में सुनवाई होनी तय थी और सभी जरूरी दस्तावेज कोर्ट में पेश कर दिए गए थे. कोर्ट से राहत की उम्मीद में अधिकारियों से सिर्फ 2 घंटे का समय मांगा गया था, लेकिन अधिकारियों ने सुनवाई होने से पहले ही आनन-फानन में तोड़फोड़ की कार्रवाई को अंजाम दे दिया.
'पिक एंड चूज' और तानाशाही का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई डीडीए अधिकारियों द्वारा अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के दाग को छुपाने के लिए की गई है. हाल ही में सैदुलाजाब में एक बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद, अधिकारी खुद को बचाने के लिए गरीबों को निशाना बना रहे हैं.
आरोप है कि मेट्रो स्टेशन से लेकर इस इलाके तक करीब 20 अवैध निर्माण चल रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने 'पिक एंड चूज' (चुनिंदा तरीके से) नीति अपनाते हुए केवल करीब 200 से 250 गरीब और बेसहारा लोगों के घरों को निशाना बनाया है. वहीं, पास में ही मौजूद कुछ रसूखदार और सेलिब्रिटीज के मकानों को राजनीतिक दबाव के कारण हाथ तक नहीं लगाया गया. बिना एसडीएम कोर्ट के आदेश और उचित दस्तावेजों के की गई इस तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई ने सैकड़ों बच्चों और परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है.
ADVERTISEMENT


