Delhi Winter Pollution Rules: दिल्ली में सर्दी दस्तक दे रही है और इसके साथ ही हवा जहरीली होने का खतरा भी बढ़ने लगा है. हर साल ठंड के मौसम में राजधानी धुंध और प्रदूषण की मोटी चादर में लिपट जाती है, लेकिन इस बार दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए ठंड की दस्तक से पहले ही एक बड़ा और नया प्लान तैयार किया है. हाल ही में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदूषण रोकने के लिए कई बड़े फैसलों का ऐलान किया है. आइए, जानते हैं इस बार दिल्ली में प्रदूषण को रोकने के लिए क्या-क्या नए नियम बनाए गए हैं, ये पहले से कैसे अलग हैं और इनका आपकी आम जिंदगी पर क्या असर पड़ने वाला है.
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इस बार का प्लान पहले से अलग क्यों है?
अब तक दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान लागू किया जाता था. इस व्यवस्था में जब हवा खराब होती थी तो नियम सख्त किए जाते थे. मतलब जब हवा में प्रदूषण फैल जाता था तब सरकार कड़े कदम उठाती थी. लेकिन इस साल सरकार ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. इस बार हवा खराब होने का इंतजार नहीं किया जाएगा. सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक के लिए पहले से ही सख्त नियम तय कर दिए हैं. ये नियम GRAP के साथ-साथ लागू रहेंगे. यानी प्रदूषण बढ़ने से पहले ही उस पर नकेल कसने की तैयारी है.
प्रदूषण रोकने के 6 सबसे बड़े नियम जान लीजिए
दिल्ली सरकार ने सर्दियों के चार महीनों के लिए जो खास प्लान बनाया है, उसके 6 प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
1. बाहरी गाड़ियों पर रोक- 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर यानी दूसरे राज्यों के रजिस्टर्ड ऐसी गाड़ियों के प्रवेश पर पाबंदी रहेगी जो BS-VI (BS-6) इमीशन स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करती हैं. हालांकि, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सीएनजी (CNG) गाड़ियों के साथ-साथ एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों को इस प्रतिबंध से पूरी छूट मिलेगी और उन्हें दिल्ली में आने की अनुमति होगी.
2. दफ्तरों के समय में बदलाव- सड़कों पर एक ही समय में गाड़ियों की संख्या को कम करने और भीषण ट्रैफिक जाम से बचने के लिए दफ्तरों के समय में बदलाव किया गया है, जिसके तहत एमसीडी (MCD) के दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक संचालित होंगे, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुलेंगे.
3. 50% वर्क फ्रॉम होम- 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के दफ्तरों को सिर्फ 50% कर्मचारियों के साथ काम करने की इजाजत होगी. बाकी 50% कर्मचारी घर से ही काम करेंगे. हालांकि अस्पताल, पुलिस, बिजली, पानी, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसी अति-आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मचारियों को इस नियम से पूरी तरह छूट दी गई है.
4. पार्किंग फीस होगी दोगुनी- सड़कों पर निजी गाड़ियों का इस्तेमाल घटाने और लोगों को बस या मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से 1 नवंबर से 28 फरवरी के बीच दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा, हालांकि दिल्ली मेट्रो (DMRC) द्वारा संचालित पार्किंग स्थलों पर यह बढ़ा हुआ शुल्क लागू नहीं होगा.
5. निर्माण और तोडफोड़ पर पाबंदी- धूल और कंस्ट्रक्शन साइट्स से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले खुले निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर रोक रहेगी, जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच पूरे शहर में निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू रहेगा. इस दौरान राष्ट्रीय महत्व और आपातकालीन सरकारी परियोजनाओं को छोड़कर रेत, बजरी, ईंट और सीमेंट ढोने वाले वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर भी रोक रहेगी.
6. एंटी-स्मॉग गन और कचरा जलाने पर रोक- इसके अलावा बड़ी इमारतों और निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन (Anti-Smog Guns) या मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. नए नियम के अनुसार रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), सोसायटियों और ठेकेदारों को अपने-अपने इलाकों में कूड़ा, प्लास्टिक, सूखी पत्तियां या बायोमास जलाने से रोकने की सीधी जिम्मेदारी दी गई है.
पूरे साल लागू रहेगा PUCC का कड़ा नियम
प्रदूषण नियंत्रण को अब केवल सर्दियों तक सीमित न रखकर सालभर चलने वाला अभियान बनाया गया है, जिसके तहत दिल्ली के किसी भी पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी पंप पर बिना वैध 'प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र' (PUCC) के ईंधन नहीं दिया जाएगा और 1 अक्टूबर से अमान्य (Invalid) PUCC वाली गाड़ियों पर नकेल कसने के लिए सड़कों पर एक विशेष चेकिंग अभियान भी चलाया जाएगा.
क्या होगा इस पूरी कवायद का फायदा?
केन्द्र और राज्य सरकार के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक, जिसमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा शामिल थे का मुख्य मकसद विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना था. एडवांस रिस्ट्रिक्शन लगाने से सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम होगी, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं घटेगा और कंस्ट्रक्शन की धूल हवा में नहीं घुलेगी. सरकार का मानना है कि इन सख्त और समय से पहले उठाए गए कदमों से दिल्ली में इस बार सर्दियों के दौरान हवा को सांस लेने लायक बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी.
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