दिल्ली की एक सुनसान सड़क पर एक इंसान तड़पता रहा, जिंदगी से लड़ता रहा… और उसी वक्त कुछ लोग उसकी मदद करने के बजाय उसका मोबाइल लूटकर भाग गए. सोचिए, किसी की आखिरी सांसों से ज्यादा कीमती एक फोन कैसे हो सकता है?
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यह सिर्फ एक अपराध नहीं है, यह हमारे समाज की संवेदनाओं पर लगा गहरा दाग है. एक कॉल, थोड़ी सी हिम्मत, या दो मिनट की इंसानियत शायद एक जान बच सकती थी.
क्या है मामला
दिल्ली के विकास नगर की एक सड़क पर एक शख्स सुबह के चार बजे अचानक चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ा और तड़पने लगा. उस वक्त उसे जरूरत थी तो बस किसी के सहारे की किसी ऐसे इंसान की जो उसे उठाकर अस्पताल पहुंचा देता. मगर अफसोस वहां मदद नहीं बल्कि बेरुखी मिली.
यह घटना रनहोला थाना क्षेत्र की बताई जा रही है. इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज को देखकर अंदेशा जताया जा रहा है कि उस व्यक्ति को दिल का दौरा या मिर्गी का अटैक पड़ा होग. वह बेसुध हालत में सड़क पर पड़ा रहा और दर्द से कराहता रहा.
स्कूटी से गुजरें दो व्यक्ति
इसी बीच एक स्कूटी पर दो युवक वहां से गुजरते हैं. उन्हें देखकर उम्मीद होती है कि शायद अब इस शख्स की जान बच जाएगी. स्कूटी पर पीछे बैठा लड़का नीचे उतरता भी है लेकिन मदद करने के लिए नहीं. वह सीधे जमीन पर पड़े व्यक्ति का मोबाइल उठाता है और वहां से निकल जाता है. शायद उसने सोचा होगा कि यह आदमी नशे की हालत में पड़ा है.
हैरानी की बात तो यह है कि कुछ ही देर बाद वह युवक फिर लौटकर आता है. इस बार उसकी नजर उस शख्स की जेबों पर जाती है और वह तलाशी लेने लगता है. लेकिन जब उसे कुछ खास नहीं मिलता तो वह वापस जाने लगता है. तभी उसकी नजर पास में लगे सीसीटीवी कैमरे पर पड़ जाती है. कैमरा देखते ही दोनों घबरा जाते हैं और तुरंत स्कूटी लेकर वहां से भाग निकलते हैं.
जमीन पर तड़पता रहा शख्स
उधर, जमीन पर पड़ा वह शख्स लगातार तड़पता रहा. वक्त बीतता गया, लेकिन मदद के लिए कोई नहीं आया. वह कई घंटों तक वह उसी हालत में सड़क पर पड़ा रहा. करीब सुबह 8 बजे जब लोग अपने घरों से बाहर निकलने लगे, तब किसी की नजर उस पर पड़ी. धीरे-धीरे वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई. मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है.
यह घटना कई सवाल खड़े करती है. क्या हम इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि किसी की जान से ज्यादा हमें उसका सामान नजर आता है? अगर उस वक्त कोई एक व्यक्ति भी हिम्मत दिखाकर मदद कर देता तो शायद नतीजा कुछ और होता.
फिलहाल पुलिस आरोपियों की पहचान करने की कोशिश में जुटी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भागती-दौड़ती जिंदगी में कहीं हम इंसानियत तो पीछे नहीं छोड़ आए?
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