राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा जल्द ही बदलने वाला है. दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े में 2,800 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं. केंद्र सरकार की 'पीएमई-ड्राइव' (PME-Drive) योजना के तहत मिलने वाली इन बसों से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि दिल्ली वालों का सफर भी काफी आसान हो जाएगा.
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वेटिंग टाइम 30 मिनट से घटकर होगा सिर्फ 10 मिनट
दिल्ली परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में दिल्ली की करीब ढाई करोड़ की आबादी के लिए 11,000 बसों की जरूरत है, जबकि सड़कों पर केवल 5,800 बसें ही चल पा रही हैं. इस कमी की वजह से यात्रियों को बस स्टैंड पर अक्सर 30 मिनट से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है. सरकार का लक्ष्य है कि इन नई 2,800 बसों के आने के बाद वेटिंग टाइम को घटाकर महज 10 मिनट कर दिया जाए.
तंग गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक दौड़ेंगी ई-बसें
इस बार बसों की खरीद में दिल्ली की भौगोलिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा गया है:
- छोटी बसें (7-9 मीटर): ये बसें दिल्ली की संकरी गलियों और तंग रास्तों पर चलाई जाएंगी ताकि कॉलोनियों के अंदर तक कनेक्टिविटी मिल सके.
- बड़ी बसें (12 मीटर): ये बसें मुख्य रूटों और चौड़ी सड़कों पर दौड़ेंगी.
योजना के अनुसार, डीटीसी के हिस्से में 1,380 बसें आएंगी, जबकि क्लस्टर सर्विस के तहत परिवहन विभाग को 1,420 बसें मिलेंगी.
दिल्ली बनेगी देश की 'इलेक्ट्रिक बस कैपिटल'
दिल्ली पहले से ही इलेक्ट्रिक बसों के मामले में देश में अव्वल है. हाल ही में 300 नई बसें जुड़ने के बाद दिल्ली में कुल बसों की संख्या 6,100 हो गई है, जिनमें से 4,338 पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हैं. नई 2,800 बसों के आने के बाद यह आंकड़ा 9,000 के करीब पहुंच जाएगा. दिल्ली सरकार का लक्ष्य साल 2029 तक सड़कों पर 12,000 इलेक्ट्रिक बसें उतारने का है, जिससे पूरी फ्लीट 100% इलेक्ट्रिक हो सके.
प्रदूषण पर कड़ा प्रहार
इन बसों के आने से दिल्ली की जहरीली हवा से भी राहत मिलने की उम्मीद है. जीरो एमिशन वाली ये बसें राजधानी में प्रदूषण कम करने में मील का पत्थर साबित होंगी. दिल्ली सरकार ने केंद्र से 3,330 और अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों की भी मांग की है.
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