ई-20 पेट्रोल के विरोध में PM आवास की ओर मार्च कर रहे अरविंद केजरीवाल को पुलिस ने रोका, सड़क पर ही धरने पर बैठे

न्यूज तक डेस्क

• 05:26 PM • 05 Aug 2026

ई-20 पेट्रोल के विरोध में 2.33 लाख पीटिशन लेकर पीएम आवास जा रहे अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस ने रोका. केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव में फैसला लेने का आरोप लगाया.

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तस्वीर: अरविंद केजरीवाल के सोशल मीडिया X से.
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ई-20 (E20) पेट्रोल की अनिवार्यता के खिलाफ आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है. मंगलवार को आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल 100 पीड़ित वाहन मालिकों और लोगों के हस्ताक्षर वाले 2.33 लाख से अधिक ज्ञापनों (पीटिशन्स) के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके आवास के लिए रवाना हुए. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने भारी बल तैनात कर उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. इसके बाद केजरीवाल नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए. बाद में पुलिस द्वारा सभी पीटिशन्स को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचाने के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ. 

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इस दौरान अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा.

ट्रंप के दबाव में देश पर थोपा जा रहा ई-20: अरविंद केजरीवाल 

धरने के दौरान अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में अमेरिका से मक्का और इथेनॉल खरीदकर भारत के लोगों पर थोप रही है.

केजरीवाल के संबोधन के मुख्य बिंदु 

पीएमओ से नहीं मिला समय: केजरीवाल ने बताया कि एक महीने पहले उन्होंने ई-20 के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री से समय मांगा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. आज जब वे जनता के 2.33 लाख पत्र लेकर गए, तो मिलने से इनकार कर दिया गया, जो सरकार की तानाशाही को दर्शाता है.

संसद में सरकार की स्वीकारोक्ति: आप संयोजक ने कहा कि सरकार ने खुद संसद में स्वीकार किया है कि ई-20 से वाहनों का माइलेज कम होता है और इंजन के रबर वाले पार्ट्स खराब होते हैं. जब इससे माइलेज गिर रही है और गाड़ियां खराब हो रही हैं, तो इसे जबरन क्यों थोपा जा रहा है?

ट्रंप का दबाव: केजरीवाल ने दावा किया कि अमेरिका में सरप्लस इथेनॉल को खपाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर दबाव बना रहे हैं और मोदी सरकार उनके आगे झुक गई है.

विधानसभाओं में प्रस्ताव: पंजाब विधानसभा में ई-20 को वापस लेने का प्रस्ताव पारित हो चुका है. इसके अलावा गुजरात, गोवा और जम्मू-कश्मीर में भी आप के विधायक ई-20 के विरोध में प्रस्ताव लाएंगे.

बड़े आंदोलन की चेतावनी: यदि सरकार ने ई-20 की अनिवार्यता को वापस नहीं लिया, तो देश भर में बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा.

30 करोड़ गाड़ियां ट्रंप के हाथों गिरवी रखीं: संजय सिंह 

आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका के दबाव में आकर केंद्र सरकार ने देश का स्वाभिमान और 30 करोड़ वाहनों का भविष्य संकट में डाल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका से लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का इथेनॉल खरीदने की तैयारी है, जिसका खामियाजा भारतीय वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है. 100 आम नागरिकों को प्रधानमंत्री से मिलने से रोकने के लिए पुलिस के 1000 जवानों को तैनात कर दिया गया.

इंजन खराब और मेंटेनेंस का बढ़ा खर्च: मनीष सिसोदिया 

वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि ई-20 के कारण देश के करोड़ों वाहन चालक परेशान हैं. लोगों की गाड़ियों का माइलेज घट गया है, इंजन में खराबी आ रही है और सर्विसिंग का खर्च काफी बढ़ गया है. जनता के भारी नुकसान के बावजूद सरकार सिर्फ अमेरिकी हितों को साधने के लिए इस फैसले पर अड़ी हुई है.

जनता की याचिका में प्रधानमंत्री से 2 प्रमुख मांगें 

आम आदमी पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री को भेजी गई 2,33,238 नागरिकों की याचिका में मुख्य रूप से दो मांगें रखी गई हैं- 

विकल्प का अधिकार (Choice of Fuel): सभी पेट्रोल पंपों पर ई-20 के साथ-साथ शुद्ध (नॉर्मल) पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि लोग अपने वाहन के अनुसार ईंधन चुन सकें.

कीमतों में कटौती: ई-20 पेट्रोल की कम कैलोरीफिक वैल्यू और कम माइलेज को देखते हुए इसकी कीमतों में कमी की जाए, ताकि जनता से खराब ईंधन के लिए पूरा पैसा न वसूला जाए.