New Delhi news: देश में चुनावों के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठना एक आम बात हो चुकी है, लेकिन इस बार दिल्ली के जंतर-मंतर से एक बेहद चौंकाने वाला दावा सामने आया है. 'ईवीएम हटाओ सेना' नाम के संगठन ने आरोप लगाया है कि मौजूदा ईवीएम व्यवस्था में तीन बड़े लूपहोल्स (कमियां) हैं, जिनकी वजह से मतदाता की पर्ची दिखने के बावजूद करीब 30 फीसदी वोटों की हेराफेरी की जा सकती है.
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संगठन के सदस्य और दिल्ली के चांदनी चौक से चुनाव लड़ चुके राहुल तिवारी ने इस संबंध में कई तकनीकी दावे किए हैं. उनका कहना है कि इंजीनियर राहुल मेहता ने एक विशेष डेमो बॉक्स तैयार कर चुनाव आयोग के सामने इस खामी को साबित करने की कोशिश की है.
तीन चीजों से खेल होने का आरोप
प्रोटेस्ट कर रहे युवाओं का दावा है कि ईवीएम और वीवीपैट (VVPAT) में मुख्य रूप से तीन स्तरों पर गड़बड़ी की गुंजाइश बनती है-
सिंबल लोडिंग फाइल: चुनाव से ठीक 14 दिन पहले मशीन में प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न अपलोड किए जाते हैं. संगठन का आरोप है कि इस सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग के दौरान 'इनसाइड टैंपरिंग' (अंदरूनी छेड़छाड़) के जरिए किसी खास चिह्न को जिताने का गुप्त कमांड डाला जा सकता है.
वीवीपैट का काला कांच: दावा किया गया है कि जून 2017 से पहले वीवीपैट का शीशा पारदर्शी होता था, जिसे बाद में बदलकर गहरा या काला कर दिया गया. इसकी वजह से लाइट बंद होने के बाद मतदाता यह स्पष्ट नहीं देख पाता कि पर्ची अंदर ही गिरी है या नहीं.
लाइट सेंसर: मशीन के भीतर लगा लाइट सेंसर यह भांप सकता है कि सामने वोटर मौजूद है या नहीं, जिससे कमांड को उसी हिसाब से बदला जा सकता है.
राहुल गांधी और केजरीवाल पर भी उठाए सवाल
राहुल तिवारी ने वीडियो में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि उनके संगठन के फाउंडर राहुल मेहता ने जनवरी 2020 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को इस कमी का लाइव डेमो दिखाया था. तिवारी का आरोप है कि दोनों नेताओं ने इस पर विचार करने की बात तो कही, लेकिन कभी इसे गंभीरता से नहीं उठाया और न ही अपने शासित राज्यों में मतपत्र (बैलेट पेपर) से चुनाव कराने का विकल्प जनता को दिया.
चुनाव आयोग से मशीन देने की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने चुनाव आयोग को बाकायदा एक डिमांड ड्राफ्ट और पत्र भेजकर असली ईवीएम देने की मांग की थी ताकि वे सार्वजनिक रूप से इस कमी को साबित कर सकें. उनका कहना है कि यह मामला बाहरी हैकिंग का नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर और असेंबलिंग के स्तर पर होने वाली अंदरूनी छेड़छाड़ का है. हालांकि, पुलिस प्रशासन द्वारा अब उन्हें जंतर-मंतर पर डेमो मशीन लाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिसके चलते वे क्यूआर कोड और सोशल मीडिया के जरिए अपना यह आंदोलन आगे बढ़ा रहे हैं.
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