CJI के एक कमेंट से शुरू हुई बात पहले सोशल मीडिया पर पहुंची. वहां मीम बने. देखते ही देखते हजारों-लाखों लोग इससे जुड़ने लगे. फिर छात्र सड़कों पर उतर आए और आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर से निकलकर देश के कई शहरों तक पहुंच गया.
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यह कहानी है 'कॉकरोच क्रांति' की. शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को धन्यवाद दिया.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आई 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी को छात्रों ने अपने विरोध की पहचान बना लिया. इसके बाद जो हुआ, उसने सोशल मीडिया पर शुरू हुई मुहिम को एक बड़े आंदोलन में बदल दिया.
आखिर 'कॉकरोच' से कैसे शुरू हुई पूरी कहानी?
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 72 दिन पहले CJI सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी से हुई थी. 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में CJI की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसी दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा 'कॉकरोच' जैसे होते हैं, जो आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं.
'कॉकरोच' शब्द सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर पोस्ट करना शुरू कर दिया.
कॉकरोच वाले इमोजी इस्तेमाल होने लगे. मीम्स और कार्टून बनने लगे. व्यंग्य वाले पोस्टर भी वायरल हुए. धीरे-धीरे छात्रों ने इसी 'कॉकरोच' को अपने विरोध की पहचान बना लिया.
अमेरिका के बॉस्टन में पढ़ाई कर रहे अभिजीत दिपके ने 16 मई 2026 को इसी नाम से 'कॉकरोच जनता पार्टी' बना ली. शुरुआत में यह केवल एक व्यंग्य वाला सोशल मीडिया पेज था, लेकिन बाद में यही पेज छात्र आंदोलन की बड़ी आवाज बन गया.
एक सोशल मीडिया अकाउंट बंद हुआ तो आंदोलन नहीं रुका. 'Cockroach is Back' नाम से नया अकाउंट सामने आया. इसके साथ नारा दिया गया- 'कॉकरोच कभी नहीं मरते.'
सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ने लगा आंदोलन
आंदोलन की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर इसके करीब 2.63 करोड़ फॉलोअर्स हो गए. यह संख्या देश की बड़ी से बड़ी राजनीतिक पार्टियों के फॉलोअर्स से भी ज्यादा थी.
जब तक सरकार इसे सिर्फ एक 'इंटरनेट का मीम' समझती रही, तब तक पानी सिर से ऊपर जा चुका था.
ऐसे आगे बढ़ता गया CJP का आंदोलन, पूरी टाइमलाइन
15 मई: 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में CJI की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसी दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा 'कॉकरोच' जैसे होते हैं, जो आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं.
16 मई: CJI की टिप्पणी के अगले दिन यानी 16 मई की रात 12 बजे अभिजीत दीपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया. इसके साथ ही इंस्टाग्राम अकाउंट और एक वेबसाइट भी शुरू की गई.
21 मई: 17 से 21 मई तक इसके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुंच गई. इसी दिन राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए CJP का X अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया. बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर अकाउंट बहाल कर दिया गया.
1 जून: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत लौटे. दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने का आह्वान किया.
2 जून: CJP ने घोषणा की कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़ेंगे. इसके बाद आंदोलन को लेकर चर्चा और तेज हो गई.
6 जून: पुलिस की अनुमति से जंतर-मंतर पर एक दिन का धरना आयोजित हुआ, जहां NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पहली बार इस्तीफा मांगा गया।
20 जून: CJP समर्थक और छात्र एक बार फिर 20 जून को जंतर-मंतर पहुंचे. इस बार प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए.
28 जून: CJP की मांगों के समर्थन में सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर दी. इसके बाद आंदोलन को और ज्यादा लोगों का समर्थन मिलने लगा.
9 जुलाई: CJP ने मानसून सत्र के पहले दिन संसद की ओर मार्च करने की घोषणा की. इसके बाद आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव संसद मार्च बन गया.
18 जुलाई: 18 जुलाई की सुबह पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से लेकर गई. इसके बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया.
20 जुलाई: आंदोलन का सबसे अहम दिन रहा. CJP ने संसद की ओर मार्च किया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई.
इसी दिन जेपी नड्डा और CJP के प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई. हालांकि बातचीत के बाद भी CJP ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया.
21 जुलाई: दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बाद सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया.
23 जुलाई: 23 जुलाई की देर रात सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिन से चल रहा अनशन समाप्त कर दिया. इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद रहे.
24 जुलाई: CJP के प्रतिनिधियों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के बीच वीपी हाउस-कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बातचीत हुई. इसमें सरकार ने CJP की तीन मांगों में से दो मांगों को मानने का आश्वासन दिया. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर चर्चा के लिए शनिवार तक का समय मांगा गया.
25 जुलाई: 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में CJP के पदाधिकारियों के साथ फिर बैठक हुई. इसके बाद CJP ने अपना आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी.
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