'एक IAS के घर फायर ब्रिगेड 25 मिनट में आई तो आम आदमी का क्या होगा?' हौज खास हादसे के बाद फूटा पड़ोसियों का गुस्सा

Hauz Khas Fire Incident: दिल्ली के हौज खास में AC ब्लास्ट और शॉर्ट सर्किट के बाद पूर्व IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार की दर्दनाक मौत हो गई. हादसे में उनका बेटा घायल हो गया, जबकि पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस की देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं. लोगों का कहना है कि जब एक पूर्व IAS अधिकारी के घर मदद 25 मिनट में पहुंचती है, तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी. जानिए पूरी कहानी.

Hauz Khas Fire Incident
Hauz Khas Fire Incident

न्यूज तक डेस्क

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देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके हौज खास से एक बेहद ही दिल दहला देने वाली और दुखद घटना सामने आई है. यहां एक घर में लगे AC में अचानक हुए शॉर्ट सर्किट और ब्लास्ट की वजह से पूर्व IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार की दर्दनाक मौत हो गई. इस भीषण हादसे में उनका बेटा भी बुरी तरह घायल हो गया है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है.

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शॉर्ट सर्किट के बाद घर में फैला धुआं, दम घुटने से मौत

घर में काम करने वाले नौकर रमेश कुमार ने हादसे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना उस समय हुई जब सभी लोग जगे हुए थे. अचानक कमरे के अंदर लगे इंडोर AC में शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते कमरे में आग लग गई. आग लगने के बाद पूरे घर में तेजी से गाढ़ा धुआं फैल गया. रमेश के मुताबिक, उन्होंने सबसे पहले मैडम (पूर्व IAS की पत्नी) को सुरक्षित बाहर निकाला.

इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी के बेटे गौरव कुमार और रमेश ने खुद अंदर जाकर साहब को बाहर निकालने की कोशिश की, क्योंकि उन्हें खुद बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया था. जब उन्हें बाहर निकाला गया तब उनकी केवल सांसें चल रही थीं और वे बात करने की स्थिति में नहीं थे. पुलिस के अनुसार, इंडोर एसी प्लांट में ब्लास्ट और आग के बाद अत्यधिक सफोकेशन (दम घुटने) के कारण पूर्व आईएएस अधिकारी की जान चली गई.

बेटे गौरव कुमार अस्पताल में भर्ती, पत्नी सुरक्षित

हादसे के समय पूर्व आईएएस अधिकारी को बचाने के प्रयास में उनका बेटा गौरव कुमार भी झुलस गया और घायल हो गया. गौरव को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. वहीं, नौकर रमेश ने बताया कि हादसे में बाल-बाल बचीं पूर्व आईएएस अधिकारी की पत्नी पूरी तरह सुरक्षित हैं और घटना के बाद वे अपने रिश्तेदारों के पास चली गई हैं.

देर से पहुंची फायर ब्रिगेड, पड़ोसियों में भारी आक्रोश

इस दुखद हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकारी सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. घटना चश्मदीद और एक पड़ोसी महिला ने बताया कि आग लगने की सूचना देने के बाद भी फायर ब्रिगेड की गाड़ी को घटना स्थल पर पहुंचने में करीब 20 से 25 मिनट का समय लग गया.

फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने देरी के लिए पतली गली होने या रास्ता भटकने का बहाना बनाया, जिसे पड़ोसियों ने पूरी तरह खारिज कर दिया. पड़ोसी महिला का कहना था कि हौज खास जैसी जगह कोई स्लम एरिया नहीं है, जहां गाड़ियां न आ सकें, फायर ब्रिगेड की गाड़ी जब आई तो बहुत आसानी से अंदर आ गई थी.

पुलिस की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल

स्थानीय निवासियों ने घटना के समय पुलिस की भूमिका पर भी रोष व्यक्त किया है. चश्मदीद महिला ने बताया कि घटनास्थल से महज 300 मीटर की दूरी पर पुलिस स्टेशन मौजूद है. जब घर में आग लगी तो RWA के ग्रुप पर तुरंत मैसेज डाला गया और लोग बाल्टियों और पाइप से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश करने लगे.

महिला ने जब खुद पुलिस स्टेशन जाकर वहां मौजूद अधिकारियों से फायर एक्सटिंग्विशर देने की गुहार लगाई, तो पुलिसकर्मियों ने यह कहकर टालने की कोशिश की कि इससे आग नहीं बुझेगी और फायर ब्रिगेड आ रही है. काफी मिन्नतें करने के बाद पुलिस ने अपना फायर एक्सटिंग्विशर दिया.

'ब्रॉकेन सिस्टम' को लेकर फूटा गुस्सा

इस घटना ने दिल्ली जैसे महानगरों में आपातकालीन सेवाओं की मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी है. मृत पूर्व आईएएस अधिकारी के पड़ोसियों का कहना है कि जब देश में इतने बड़े और प्रतिष्ठित पद पर रहे व्यक्ति के घर पर समय से मदद नहीं पहुंच पा रही है, तो देश के किसी आम नागरिक का भगवान ही मालिक है. टैक्सपेयर्स होने के बावजूद जनता को ऐसा लचर इंफ्रास्ट्रक्चर और 'ब्रॉकेन सिस्टम' मिल रहा है, जो बेहद निराशाजनक है. फिलहाल पुलिस इस पूरे हादसे के कारणों और एसी ब्लास्ट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है.

यहां देखें वीडियो

 

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