देश के अग्रणी मीडिया हाउस India Today Group ने पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़ा प्रयोग करते हुए AI-ड्रिवन न्यूज एंकर ‘सूत्र’ लॉन्च कर दिया है. इसकी घोषणा India AI Impact Summit 2026 के दौरान की गई. ग्रुप ने यह प्रोग्राम भारतीय AI स्टार्टअप BharatGen के साथ मिलकर तैयार किया है, जबकि इसे Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) के मंच पर प्रदर्शित किया गया.
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‘सूत्र’ को खास तौर पर जटिल और रियल-टाइम जानकारियों को आसान भाषा में समझाने, पॉलिसी चर्चाओं को आम लोगों तक पहुंचाने और लाइव इवेंट्स से तुरंत अपडेट देने के लिए डिजाइन किया गया है.
क्या है ‘सूत्र’ की खासियत?
- ‘सूत्र’ एक AI न्यूज एंकर है.
- ये रियल-टाइम न्यूज अपडेट देगी.
- जटिल पॉलिसी और टेक्निकल मुद्दों को आसान बनाएगी.
- समिट और बड़े इवेंट्स से तुरंत टेकअवे शेयर करेगी.
- मल्टी-लैंग्वेज और भारतीय बोलियों को सपोर्ट करेगी.
- इसका मकसद हाई-लेवल जानकारी और आम जनता की समझ के बीच की दूरी को खत्म करना है.
- ‘AI सैंडविच’ मॉडल से एडिटोरियल कंट्रोल.
- लॉन्च की सबसे अहम बात रही 'AI Sandwich' मॉडल, जिसे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन Kalli Purie ने तैयार किया है.
इस मॉडल में
- शुरुआत इंसानी एडिटोरियल इंटेंट
- बीच में AI प्रोसेसिंग
- अंत में इंसानी वेरिफिकेशन
यानी AI सिर्फ टूल रहेगा, फैसला इंसानों का होगा. इससे फेक या भ्रामक खबरों का खतरा कम रहेगा.
ग्रुप के चीफ AI ऑफिसर Neelanjan Das ने कहा-
''सूत्र का मकसद तेजी से बदलते न्यूज साइकिल में लोगों को स्पष्ट और आसान जानकारी देना है. AI के जरिए ज्यादा लोगों तक भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है. भारतजेन के साथ काम करके, हम यह पता लगा रहे हैं कि AI का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है ताकि ज़्यादा लोगों तक जानकारी ज़्यादा आसानी से पहुंच सके और सबको शामिल किया जा सके, साथ ही इंडिया टुडे ग्रुप जिन एडिटोरियल स्टैंडर्ड के लिए जाना जाता है, उन्हें बनाए रखा जा सके. भारतजेन के साथ यह हमें एक सॉवरेन AI भविष्य के करीब लाता है.''
भारतजेन के CEO Rishi Bahl बोले-
''AI को भारतीय मीडिया के माहौल को सच में बदलने के लिए, इसे सिर्फ ऑटोमेशन से आगे बढ़कर डीप कॉन्टेक्स्चुअल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ना होगा. भारतजेन ऐसे सॉवरेन, मल्टीमॉडल मॉडल्स में आगे है जो भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय बोलियों की नैचुरल बारीकियों को समझते हैं. AI एंकर्स और रियल-टाइम न्यूज के इस जमाने में, हमारा फोकस एक मजबूत टेक्नोलॉजिकल बैकबोन बनाने पर है जो अलग-अलग डेमोग्राफिक्स में बारीक कहानी कहने की इजाजत दे. स्वदेशी AI कैपेबिलिटीज देकर, हम यह पक्का कर रहे हैं कि भारतीय पत्रकारिता का भविष्य ऐसी टेक्नोलॉजी से चले जो कल्चरली अवेयर हो, भाषाई रूप से सबको शामिल करने वाली हो, और पूरी तरह से देसी जमीन पर बनी हो.''
क्यों अहम है ये कदम?
- भारतीय मीडिया में AI एंकर का नया प्रयोग.
- लोकल भाषाओं में न्यूज डिलीवरी.
- रियल-टाइम और डेटा-ड्रिवन रिपोर्टिंग.
- सॉवरेन (देसी) AI टेक्नोलॉजी पर फोकस.
- विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल भारतीय डिजिटल पत्रकारिता का भविष्य बदल सकती है.
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