दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रहे छात्रों को बड़ी राहत मिली है. करीब 20 साल बाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने का रास्ता खुलता नजर आ रहा है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सोमवार को जारी आदेश में कहा है कि छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे.
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यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब छात्र लंबे समय से निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. हाल के दिनों में परिसर में धरना और भूख हड़ताल भी हुई. ऐसे में प्रशासन के ताजा आदेश को छात्रसंघ चुनाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
संविधान की मंजूरी के बाद तय होगी चुनाव की तारीख
विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश के मुताबिक, छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए उसके संविधान को मंजूरी मिलना जरूरी है. मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे. हालांकि, संविधान को मंजूरी देने की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है. ऐसे में चुनाव किस दिन होंगे, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है. अब चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के लिए संविधान की मंजूरी का इंतजार रहेगा. इसके बाद ही चुनाव की समयसीमा साफ हो सकेगी.
2006 में भंग हुआ था छात्रसंघ
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ को साल 2006 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने भंग कर दिया था. इसके बाद से ही छात्र निर्वाचित छात्रसंघ को बहाल करने और चुनाव कराने की मांग उठाते रहे हैं. छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ के जरिए वे अपनी समस्याएं और मांगें लोकतांत्रिक तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रख सकते हैं. लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण छात्र लगातार इस व्यवस्था को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे थे.
हाल के दिनों में भी इसी मुद्दे पर परिसर में विरोध प्रदर्शन हुए. अब प्रशासन ने चुनाव कराने की घोषणा की है, लेकिन इसकी प्रक्रिया संविधान को मंजूरी मिलने के बाद ही आगे बढ़ेगी.
प्रदर्शन के बीच ऑनलाइन हुई थीं क्लास
छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच 24 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सभी कोर्स की ऑफलाइन क्लास अगले आदेश तक ऑनलाइन करने का फैसला लिया था. इस फैसले के बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ गई. 25 अक्टूबर को ऑनलाइन क्लास के विरोध में छात्र कैंपस के गेट नंबर 7 के बाहर जुटे. यहां बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किया और हंगामा देखने को मिला. छात्रों का विरोध एक तरफ छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी था, वहीं दूसरी तरफ ऑफलाइन कक्षाएं बंद करने के फैसले ने भी विवाद बढ़ा दिया.
अब चुनाव की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
जामिया में करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा से लंबे समय से उठ रही मांग पर आगे बढ़ने की उम्मीद बनी है. हालांकि, अभी चुनाव की तारीख तय नहीं हुई है.
प्रशासन के आदेश के अनुसार, संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर मतदान कराना होगा. ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि छात्रसंघ के संविधान को कब मंजूरी मिलती है और चुनाव की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है.
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