जंतर-मंतर डिनोटिफाइड होने पर भड़के अभिजीत दिपके, सौरव-आशुतोष समेत CJP के लोगों कि गिरफ्तारी पर दिया बड़ा बयान!

न्यूज तक डेस्क

• 02:10 PM • 13 Oct 2026

Abhijeet Dipke News: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर पहुंचे CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लिया. जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर अभिजीत दिपके भड़क उठे. उन्होंने सवाल किया कि क्या तिरंगा फहराना कानून का उल्लंघन है और चेतावनी दी कि विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. जानिए पूरा मामला.

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दिल्ली के जंतर-मंतर को डिनोटिफाई किए जाने और वहां तिरंगा फहराने को लेकर CJP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का मामला गरमाता जा रहा है. इस पूरे घटनाक्रम पर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे तानाशाही मानसिकता का सबसे बड़ा उदाहरण करार दिया है. अभिजीत दिपके के मुताबिक, जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना किसी भी तरह से कानून का उल्लंघन नहीं हो सकता है, बल्कि यह देश के नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है.

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जंतर-मंतर पर तिरंगे को लेकर क्या है पूरा विवाद

मीडिया से बातचीत करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि, आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में उनकी टीम आज सुबह जंतर-मंतर पर पहुंची थी. इस दौरान उन्होंने वहां तिरंगा लहराया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और गिरफ्तार कर लिया. इस बात पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया कि भारत देश में तिरंगा लहराना कब से कानून का उल्लंघन हो गया है. उनका कहना था कि जो लोग यह सोचते हैं कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना कोई जुर्म या वॉयलेशन है, वे देशद्रोही की श्रेणी में आते हैं. उन्होंने मांग की कि सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और उनके साथियों की गिरफ्तारी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए, क्योंकि किसी को भी सिर्फ तिरंगा लहराने के आरोप में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

तानाशाही मानसिकता और जंतर-मंतर का महत्व

अभिजीत दिपके ने सरकार और प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा कि यह तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है. तानाशाहों को यह रास नहीं आता कि कोई जंतर-मंतर जैसी जगह पर जाकर तिरंगा लहराए. उन्हें ऐसा लगता है कि पूरा देश उनकी अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी है, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जंतर-मंतर सिर्फ कुछ लोगों की नहीं है, बल्कि यह देश के 140 करोड़ भारतीयों का है. यह आंदोलनकारियों और नागरिकों का अधिकार है कि वे वहां अपनी बात रखें. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा तब तक लहराया जाएगा जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते. उन्होंने साफ-साफ कहा है कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा.

गिरफ्तारियों और कानूनी प्रक्रिया पर अपडेट

इस मामले में आगे की जानकारी देते हुए बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई में कुल 10 से 15 टीम मेंबर्स को गिरफ्तार किया गया है, जिन्हें आशुतोष, अजिंक्य और सौरव लीड कर रहे थे. जब उनसे यह पूछा गया कि क्या इस कानूनी मामले में कपिल सिब्बल या किसी अन्य बड़े नेता से बातचीत चल रही है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसी कोई बात नहीं हुई है. हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस वकीलों से बात करने की अनुमति देगी और उनके साथ वैसा बर्ताव नहीं किया जाएगा जैसा पहले उनके साथ किया गया था, जहां उन्हें बिना किसी वकील से बात किए 24 घंटे तक रखा गया था. उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को वकीलों से मिलने और बात करने का अधिकार मिलना ही चाहिए, क्योंकि किसी को भी इस तरह से अचानक उठाकर नजरबंद नहीं किया जा सकता.

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