जंतर-मंतर की भीड़ में आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग? दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा

न्यूज तक डेस्क

• 10:49 AM • 25 Jul 2026

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान FRS तकनीक से 2500 से ज्यादा आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान करने का दावा किया है. प्रदर्शन स्थल के आसपास चार FRS यूनिट लगाई गई हैं. पुलिस अब तक 15 FIR दर्ज कर चुकी है. कैमरे पुलिस डेटाबेस से जुड़े हैं.

jantar mantar
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से प्रदर्शन स्थल पर अब तक 2500 से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. इस मामले में पुलिस अब तक 15 FIR दर्ज कर चुकी है.

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चार जगह लगाई गईं FRS यूनिट

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में प्रदर्शन चल रहा है. बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के आसपास चार FRS यूनिट तैनात की हैं.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये यूनिट मुख्य एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर लगाई गई हैं. सभी यूनिट दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से जुड़ी हैं. पुलिस अधिकारी लगातार इनकी निगरानी कर रहे हैं.

2500 से ज्यादा लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा

पुलिस सूत्रों का दावा है कि FRS की मदद से अब तक 2500 से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनका पहले से आपराधिक इतिहास रहा है. आरोप है कि इनमें से कुछ लोग भीड़ के बीच मौजूद रहकर पुलिसकर्मियों को निशाना बना रहे थे.

पुलिस का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य सामान्य प्रदर्शनकारियों की निगरानी करना नहीं है. इसका इस्तेमाल वांछित अपराधियों, फरार आरोपियों और बार-बार अपराध में शामिल रहे लोगों की पहचान के लिए किया जा रहा है.

कुछ ही सेकंड में डेटाबेस से होता है मिलान

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, FRS में हाई रेजोल्यूशन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये कैमरे दूर से भी लोगों के चेहरे कैद कर सकते हैं.

कैमरे में चेहरा आने के बाद सिस्टम कुछ ही सेकंड में दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से उसका मिलान करता है. अगर किसी वांछित या फरार आरोपी की पहचान होती है तो संबंधित पुलिस यूनिट को तुरंत सूचना भेजी जाती है. इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है.

'बैड कैरेक्टर' के तौर पर दर्ज लोगों पर भी नजर

पुलिस के मुताबिक, FRS उन आदतन अपराधियों की पहचान करने में भी मदद कर रहा है, जो पहले कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं. पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे कुछ लोगों को 'बैड कैरेक्टर' के रूप में दर्ज किया जाता है.

अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले लोगों की समय रहते पहचान करना है. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सामान्य प्रदर्शनकारियों को परेशानी न हो.

दिल्ली में पहले भी हो चुका है FRS का इस्तेमाल

दिल्ली पुलिस के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल नया नहीं है. इससे पहले गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.

इसके अलावा होली, दिवाली, ईद और रामलीला जैसे त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में FRS कैमरे लगाए जा चुके हैं.