कौन हैं जस्टिस तेजस करिया? जिन्होंने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ PIL की सुनवाई से खुद को किया अलग

Judge Tejas Karia Profile: दिल्ली हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामले में जस्टिस तेजस करिया के रीक्यूज़ल ने कानूनी हलकों में नई बहस छेड़ दी है. जानिए कौन हैं जस्टिस तेजस करिया, उन्होंने केस से खुद को अलग क्यों किया, क्या है 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ा पूरा विवाद.

Justice Tejas Karia Profile
Justice Tejas Karia

वैशाली

follow google news

दिल्ली हाई कोर्ट में इन दिनों जजों का केस से अलग होना (Recusal) काफी चर्चा में है. पहले जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल के केस से हटने की मांग वाली याचिका को खारिज किया, वहीं अब हाई कोर्ट के एक और जज, जस्टिस तेजस करिया ने खुद को केजरीवाल के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई से अलग कर लिया है. आइए विस्तार से जानते है पूरा मामला और कौन हैं जस्टिस तेजस करिया.

Read more!

क्यों हटे जस्टिस तेजस करिया?

यह मामला कोर्ट की कार्यवाही की अवैध रिकॉर्डिंग और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने से जुड़ा है. आरोप है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं ने नियमों का उल्लंघन कर सुनवाई का वीडियो साझा किया. जैसे ही यह मामला जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने आया, उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया.

जस्टिस करिया ने अदालत में स्पष्ट किया कि एक वकील के तौर पर वह पहले इसी तरह के एक मामले में मेटा और फेसबुक की तरफ से पेश हो चुके हैं. चूंकि वर्तमान याचिका भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी से जुड़ी थी, इसलिए 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (हितों के टकराव) से बचने के लिए उन्होंने केस छोड़ना ही उचित समझा.

कौन हैं जस्टिस तेजस करिया?

जस्टिस तेजस करिया को दिल्ली हाई कोर्ट के सबसे 'टेक-सेवी' और आधुनिक जजों में गिना जाता है. उनके बारे में कुछ मुख्य बातें:

शिक्षा: इनका जन्म गुजरात में हुआ. इन्होंने पुणे के आईएलएस लॉ कॉलेज से पढ़ाई की और दुनिया के प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्सॉ से मास्टर्स की डिग्री हासिल की.

करियर: जज बनने से पहले वे देश की सबसे बड़ी लॉ फर्म्स में से एक में सीनियर पार्टनर थे. उन्हें कमर्शियल लॉ, आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) और आईटी कानून का विशेषज्ञ माना जाता है.

नियुक्ति: उनकी नियुक्ति 14 फरवरी, 2025 को हुई थी. वे उन दुर्लभ जजों में से हैं जो सीधे एक टॉप लॉ फर्म के पार्टनर से जज बने हैं.

कानून की दुनिया में सराहना

जस्टिस करिया के इस फैसले की कानूनी जगत में काफी तारीफ हो रही है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस. ओखा की उस बात को चरितार्थ किया जिसमें कहा गया था कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए. अब केजरीवाल से जुड़ी यह याचिका हाई कोर्ट की दूसरी बेंच के पास जाएगी.

    follow google news