दिल्ली शराब नीति मामले में गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला. भ्रष्टाचार की जांच से शुरू हुआ यह मामला अब न्यायिक गरिमा और अदालत की अवमानना तक पहुंच गया है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए साफ कर दिया कि न्यायपालिका को निशाना बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
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कोर्ट में मचा हड़कंप, जज ने जताई कड़ी नाराजगी
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच में जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, माहौल पूरी तरह बदल गया. जस्टिस शर्मा ने खुलासा किया कि कुछ रिस्पोंडेंट्स ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अत्यंत मानहानिकारक और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक जज के रूप में उनका काम तथ्यों पर फैसला देना है, लेकिन जिस तरह से उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया गया, वह न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है. उन्होंने कड़े लहजे में कहा, 'मैं अब चुप नहीं रह सकती'.
सिर्फ क्रिमिनल अपील नहीं, अब अवमानना का मामला
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि अब यह मामला केवल एक क्रिमिनल अपील तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना का मामला बन चुका है. उन्होंने दो टूक कहा कि वे उन व्यक्तियों के खिलाफ सख्त अवमानना की कार्रवाई करेंगी जिन्होंने कोर्ट को बदनाम करने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है.
क्या है पूरा विवाद और केजरीवाल का पक्ष?
यह पूरा विवाद ट्रायल कोर्ट के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अरविंद केजरीवाल समेत 23 लोगों को डिस्चार्ज कर दिया गया था. सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. गुरुवार को जस्टिस शर्मा को इस मामले में एमिकस क्यूरी की घोषणा करनी थी, लेकिन उससे पहले ही उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कैंपेन शुरू कर दिया गया. इसी बीच अरविंद केजरीवाल की ओर से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हटने (Recusal) के लिए आवेदन दिया गया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.
नेताओं का ओपन लेटर और कोर्ट का कड़ा संदेश
रिक्यूजल एप्लीकेशन खारिज होने के बाद एक नया मोड़ तब आया जब अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने एक ओपन लेटर लिखा. इस पत्र में उन्होंने कहा कि न तो वे खुद और न ही उनका कोई वकील जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने पेश होगा. इस पर जस्टिस शर्मा ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी तरह के दबाव या निजी हमलों के आगे नहीं झुकेंगी. कोर्ट इस मामले में शाम 5:00 बजे एक विस्तृत आदेश पारित करेगा, जिसमें अवमानना करने वालों के नाम और उन पर होने वाली कार्रवाई का विवरण हो सकता है.
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