देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर सवालों के घेरे में है. एनटीए ने खुद यह बात स्वीकार की है कि उसने RTI के तहत मांगी गई एक अहम जानकारी का आधा-अधूरी जवाब दिया था. यह खुलासा तब हुआ जब इंडिया टुडे ने इस संबंध में एक रिपोर्ट पब्लिश की. रिपोर्ट के सामने आते ही एनटीए ने आनन-फानन में अपनी गलती मानते हुए एक नया स्पष्टीकरण जारी किया और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे को सामने रखकर सफाई दी.
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दरअसल, यह पूरा मामला नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनी कमेटी की सिफारिशों से जुड़ा हुआ है. पहले एनटीए ने आरटीआई के जवाब में कहा था कि उसके पास सुधारों को लेकर कोई अंतिम या ठोस रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. लेकिन मीडिया में खबर आते ही एजेंसी के बड़े अधिकारियों ने रात के वक्त एक ईमेल के जरिए माना कि पहले दिया गया जवाब अधूरा था और उसमें पूरी बात नहीं बताई गई थी.
गलती सुधारने के लिए दिखाए दस्तावेज
एनटीए के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (FAA) ने साफ किया कि उनके केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) से अनजाने में यह चूक हुई थी. अपनी सफाई में एजेंसी ने दो सरकारी दस्तावेज पेश किए हैं. इसमें सुप्रीम कोर्ट में जमा किया गया वह विस्तृत हलफनामा भी है, जिसमें परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई है. यह बात इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि अधिकारी पहले दावा कर रहे थे कि 70 से 75 फीसदी सुधार लागू हो चुके हैं, जबकि आरटीआई के कागजात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे.
101 सिफारिशों को 46 ग्रुपों में बांटा
नया बयान जारी करते हुए एनटीए ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने परीक्षा सुधार के लिए 101 सुझाव दिए थे. इन सुझावों में एजेंसी के दोबारा गठन, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाने, छात्रों के वेरिफिकेशन को पुख्ता करने, नई तकनीक का इस्तेमाल करने और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हेल्पलाइन शुरू करने जैसी बड़ी बातें शामिल हैं. एनटीए के मुताबिक, इन सभी 101 सिफारिशों को काम आसान करने के लिए 46 मुख्य हिस्सों (ग्रुप) में बांटा गया है.
कौन रख रहा है सुधारों पर नजर?
पहले वाले आरटीआई जवाब में जिस निगरानी तंत्र का कोई जिक्र नहीं था, अब एनटीए ने उसके बारे में भी बताया है. एजेंसी के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने 14 नवंबर 2024 को एक 'हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी' बनाई थी, जिसकी जिम्मेदारी इन सुधारों की निगरानी करना है. इस कमेटी की अगुवाई भी के. राधाकृष्णन ही कर रहे हैं. कमेटी समय-समय पर बैठकें करके काम की समीक्षा करती है, जिसकी आखिरी बैठक इसी साल 17 अप्रैल 2026 को हुई थी.
सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में क्या हैं दावे?
एनटीए ने कोर्ट को बताया है कि परीक्षा में धांधली रोकने के लिए कई बड़े और कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं. इनमें से प्रमुख प्वाइंट...
- उम्मीदवारों का चेहरा पहचानना (फेस ऑथेंटिकेशन) और आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन.
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और कई स्तरों पर सघन तलाशी.
- परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल सिग्नल जाम करने के लिए जैमर का इस्तेमाल और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के नए नियम.
- आगामी परीक्षा के लिए देश भर में 621 जिला स्तरीय कमेटियों का गठन.
- करीब 5,432 केंद्रों पर 1.85 लाख से ज्यादा एआई टूल्स वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना, जो किसी भी संदिग्ध हरकत को तुरंत पकड़ सकें.
मूल सवाल का जवाब अब भी गायब
भले ही एनटीए ने अपनी गलती मान ली हो और सुप्रीम कोर्ट का हलफनामा दिखाकर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की हो, लेकिन असली सवाल का जवाब अब भी नहीं मिला है. आरटीआई के जरिए साफ तौर पर पूछा गया था कि जो 101 सुधार सुझाए गए थे, उनमें से एक-एक कर किस सुधार को कितना लागू किया गया है.
एजेंसी ने जो भी नए दस्तावेज दिए हैं, उनमें कोई ऐसी लिस्ट या ट्रैकर नहीं है जो यह बता सके कि कौन सी सिफारिश पूरी तरह जमीन पर उतरी है और कौन सी अभी भी फाइलों में बंद है. ऐसे में आज भी आम जनता या छात्रों के पास ऐसा कोई जरिया नहीं है, जिससे वे स्वतंत्र रूप से जान सकें कि नीट विवाद के बाद देश की परीक्षा प्रणाली असल में कितनी सुरक्षित हुई है.
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