दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता नेहा का भाषण सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. उन्होंने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र आंदोलन को बदनाम करने और दबाने की कोशिश की जा रही है. नेहा ने आरोप लगाया कि पहले पुलिस दो दिनों तक पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करती रही, लेकिन जब एक मीडियाकर्मी का एमएलसी (मेडिकल रिपोर्ट) सामने आया, तब जाकर पुलिस को पैलेट गन चलाने की बात स्वीकार करनी पड़ी.
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अमित शाह और दिल्ली पुलिस की जवाबदेही पर सवाल
नेहा ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह की स्पष्ट अनुमति और जानकारी के बिना सेंट्रल दिल्ली में आम नागरिकों व छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों को तितर-बितर करने के लिए इस तरह के हिंसक तरीकों को सामान्य बनाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों को लगी पैलेट चोटों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक दिल्ली पुलिस कमिश्नर और गृह मंत्री को बचकर निकलने नहीं दिया जाएगा.
'2800 अपराधियों' वाले दावे को बताया फर्जी
सरकार और पुलिस की ओर से जारी 2800 लोगों के क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले आंकड़े पर नेहा ने कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को पहले से पता था कि जंतर-मंतर पर हजारों अपराधी आने वाले हैं, तो वे किस बात का इंतजार कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि यह मनगढ़ंत आंकड़ा केवल 50 दिनों से अधिक समय से चले आ रहे इस शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को बदनाम और डिसक्रेडिट करने के लिए तैयार किया गया है.
विभिन्न राज्यों में छात्रों के दमन का आरोप
नेहा ने अपने भाषण में बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों में छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार पर भी गहरी चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में मुस्लिम और दलित छात्रों को निशाना बनाकर उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है और डराया-धमकाया जा रहा है. बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां उपद्रवियों के नाम पर आम छात्रों और वकीलों को बेवजह गिरफ्तार कर जेलों में ठूंसा जा रहा है.
आंदोलन की मुख्य मांगें
नेहा ने जोर देकर कहा कि देश भर के छात्र अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं. पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की स्वीकृति है(जो पूरी हो चुकी है), दूसरी मांग पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले सभी गिरफ्तार छात्रों और प्रदर्शनकारियों की रिहाई व उनके ऊपर दर्ज मुकदमों को तुरंत वापस लेना है. तीसरी मांग पैलेट गन और दमनकारी कार्रवाइयों के जिम्मेदार पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की है.
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