इलेक्टोरल रोल में गड़बड़ी, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस की ओर से जारी किए गए 'पीस बॉन्ड' नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के रुख के बाद आंदोलनकारियों की ओर से नेहा बोरा और उनके कानूनी सहयोगियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी आगे की रणनीति का खुलासा किया है.
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'पीस बॉन्ड साइन करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन'
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेहा बोरा ने स्पष्ट कहा कि पुलिस द्वारा थमाया गया 'पीस बॉन्ड' केवल शांति बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि आम जनता को सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने से रोकने का एक जरिया बनता जा रहा है. उन्होंने कहा, "संविधान हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, जबकि इस तरह के बॉन्ड थोपकर नागरिकों से यह अधिकार छीना जा रहा है. इसलिए मैं इस पीस बॉन्ड पर किसी भी हाल में साइन नहीं करूंगी."
हाईकोर्ट के आदेश में क्या मिला?
कल दिल्ली हाईकोर्ट से आए आदेश पर बात करते हुए उनके कानूनी प्रतिनिधि ने बताया कि कोर्ट ने नोटिस के मेरिट्स पर सीधे हस्तक्षेप न करते हुए एससीएम (Sub-Divisional Executive Magistrate) के समक्ष इंक्वायरी प्रक्रिया में शामिल होने का निर्देश दिया है. हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 38 (पेज 34) में यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि पुलिस और प्रशासन को याचिकाकर्ता को वह सारा मटेरियल और सबूत (जैसे एफआईआर, कलंदरा या रिपोर्ट) मुहैया कराना होगा, जिसके आधार पर उन पर शांति भंग करने की आशंका जताई गई है.
कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि 'प्रिंसिपल्स ऑफ नेचुरल जस्टिस' (प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों) का उल्लंघन न हो. यदि इंक्वायरी के दौरान किसी भी प्रक्रियात्मक खामी या अधिकार हनन की स्थिति बनती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
तथ्यों के बिना जारी किया गया नोटिस
नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा भेजा गया शो-कॉज नोटिस तथ्यात्मक रूप से गलत है। नोटिस में कनॉट प्लेस (सेंट्रल पार्क) में शांति भंग का जिक्र था, जबकि उनका प्रदर्शन मंडी हाउस के पास हुआ था जो पूरी तरह शांतिपूर्ण और फुटपाथ पर था। उन्होंने सवाल उठाया कि 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने जैसे गंभीर मुद्दे पर सवाल पूछना शांति भंग कैसे हो सकता है?
आगे क्या होगा कदम?
नेहा बोरा ने बताया कि वह एससीएम कोर्ट के सामने पेश होंगी और हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत पुलिस से उन सभी सबूतों और दस्तावेजों की मांग करेंगी जिनके आधार पर उन पर शांति भंग का अंदेशा जताया गया है. उन्होंने दोहराया कि यह लड़ाई केवल एक नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने के अधिकार को बचाने के लिए आगे भी कानूनी और सड़क स्तर पर जारी रहेगी.
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