आने वाले समय में दिल्ली की रफ्तार को बढ़ाने के लिए कचरा एक बड़ा जरिया बनने जा रहा है. जिस कचरे को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, अब उसी से देश की राजधानी में सरकारी बसें दौड़ती हुई नजर आएंगी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ग्रीन एनर्जी और वैकल्पिक ईंधन को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले दावे किए हैं. दिल्ली बीजेपी के एक युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने देश के सामने एक ऐसा विजन रखा है, जो आने वाले समय में भारत की तस्वीर बदल सकता है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पिछले 50 सालों में उनकी कोई भी भविष्यवाणी गलत साबित नहीं हुई है और अब उनका अगला बड़ा लक्ष्य दिल्ली की बसों को म्यूनसिपल कचरे से बनी हाइड्रोजन से चलाना है.
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दिल्ली के एक्सप्रेसवे और कचरे का इस्तेमाल
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी कि दिल्ली में एक्सप्रेसवे बनाने के काम में लैंडफिल साइटों के करीब 80 लाख टन कचरे का इस्तेमाल पहले ही सफलतापूर्वक किया जा चुका है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तो महज एक शुरुआत है. आने वाले वक्त में इस म्यूनसिपल कचरे को अलग-अलग श्रेणी में विभाजित किया जाएगा. इसके बाद बायो हाइजेस्टर तकनीक के जरिए इस कचरे से शुद्ध हाइड्रोजन गैस तैयार की जाएगी, जिससे दिल्ली की सरकारी बसें सड़कों पर दौड़ेंगी. उनका मुख्य विज़न यह है कि गाड़ियां चलाने के लिए पानी और कचरे का उपयोग किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने साल 2027 तक पूरे देश को कचरा मुक्त करने के एक मेगा प्लान के बारे में भी बात की.
'वेस्ट टू वेल्थ' यानी कचरे से कमाई का मॉडल
केंद्रीय मंत्री ने केवल तकनीक की ही बात नहीं की, बल्कि वेस्ट टू वेल्थ यानी कचरे से मोटी कमाई करने के आर्थिक मॉडल पर भी विशेष जोर दिया. उन्होंने अपने खुद के संसदीय क्षेत्र का एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की म्यूनसिपल कॉरपोरेशन ट्रीट किए गए गंदे पानी को बेचकर हर साल लगभग 325 करोड़ रुपये कमा रही है. जो गंदा पानी पहले बेकार बहकर पर्यावरण में प्रदूषण फैलाता था, वह आज करोड़ों रुपये की कमाई का एक बड़ा जरिया बन चुका है. नितिन गडकरी का मानना है कि अगर यह मॉडल पूरे देश के शहरों में लागू कर दिया जाए, तो भारत के शहरों की पूरी काया पलट हो सकती है.
वैकल्पिक ईंधन और रोजगार के नए अवसर
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि एथेनॉल वाले पेट्रोल से देश के तेल आयात (इम्पोर्ट) में भारी बचत होने वाली है. सरकार देश को पेट्रोलियम पर निर्भरता से मुक्त कराने के लिए एथेनॉल, मेथेनॉल और बायोडीजल जैसे वैकल्पिक ईंधनों को लगातार बढ़ावा दे रही है. इसके अतिरिक्त, भारत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश में बने इलेक्ट्रिक स्कूटरों को अब विदेशों में एक्सपोर्ट भी किया जा रहा है. इन सभी क्लीन फ्यूल तकनीकों के आने से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा होंगे, जो भारत को आत्मनिर्भर और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा.
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