फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में सवार यात्रियों का भयानक अनुभव सामने आया है. उड़ान के दौरान हुए भीषण टर्बुलेंस (झटकों) में कई यात्री घायल हो गए. इसके साथ ही यात्रियों ने आरोप लगाया है कि फ्लाइट का मुख्य पायलट नशे की हालत में दिख रहा था और उसका व्यवहार बेहद गैर-जिम्मेदाराना था.
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फुकेट से दिल्ली जा रही इस फ्लाइट में सवार यात्रियों के लिए यह सफर किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था. फ्लाइट के दौरान अचानक हुए तेज टर्बुलेंस के कारण विमान में अफरा-तफरी मच गई. सीटें छोड़ चुके यात्री, छोटे बच्चे और बुजुर्ग हवा में उछलकर दूर जा गिरे. कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं.
शर्ट टक्ड इन नहीं थी, चाल भी सीधी नहीं थी
वीडियो रिपोर्ट में एक महिला यात्री ने बताया कि प्लेन में बैठते ही आगे बैठे यात्रियों को पायलट के बर्ताव और हाव-भाव पर शक होने लगा था, "जब पायलट कॉकपिट में घुसा, तभी लोगों को लगा कि वह सीधे नहीं चल पा रहा था. उसकी शर्ट भी टक्ड इन नहीं थी. हम जानते हैं कि पायलट्स हमेशा टिप-टॉप और अनुशासित दिखते हैं लेकिन यह पायलट गुस्से और बहुत अजीब स्थिति में दिख रहा था."
महिला यात्री ने आगे बताया कि जब टर्बुलेंस हुआ तो प्लेन नीचे जाने लगा. पास बैठा 3 साल का बच्चा उछलकर पीछे चला गया. झटका इतना तेज था कि महिला यात्री के रिब्स में चोट आई और उनके पति सीट से हवा में उछल गए.
टर्बुलेंस के बाद का खौफनाक मंजर
एक अन्य पीड़ित यात्री ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि प्लेन में उनकी पत्नी, बच्चे और सास-ससुर साथ बैठे थे. टर्बुलेंस इतना भयानक था कि उनकी सास की पसलियों में फ्रैक्चर आ गया और ससुर जी को भी गंभीर चोटें लगी हैं.
यात्री ने कहा:
"हम अपनी आंखों के सामने पूरे परिवार को तड़पते और घबराते देख रहे थे. मन में यही आ रहा था कि शायद यह हमारी जिंदगी का आखिरी वक्त है. अगर पायलट सो रहा होता और सही समय पर नहीं उठता, तो शायद हम आज जिंदा नहीं बचते."
डोप टेस्ट की मांग की, तब सामने आया सच
यात्री का आरोप है कि पायलट को पता था कि अगर वह लखनऊ जैसे छोटे एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करता तो वहां तुरंत उसकी गहन जांच (Medical & Dope Test) हो जाती. इसीलिए वह दिल्ली तक फ्लाइट खींचकर ले आया. दिल्ली के टर्मिनल-3 पर उतरने के बाद यात्रियों ने टर्मिनल-3 के हेड मिस्टर रविशंकर गौर से मिलकर लिखित में बहुत सख्त शिकायत दर्ज कराई. यात्रियों ने मांग की कि पायलट का तुरंत डोप टेस्ट (Dope Test) और ब्लड टेस्ट कराया जाए. यात्रियों के मुताबिक जांच के बाद ही सच सामने आया.
केबिन क्रू रहे असली हीरो
यात्रियों ने जहां पायलट के रवैये पर भारी नाराजगी जताई, वहीं एयरलाइंस के केबिन क्रू (फ्लाइट अटेंडेंट्स और एयर होस्टेस) की जमकर तारीफ की. यात्रियों का कहना था कि झटकों के बाद जब माहौल बहुत डरावना हो गया था, तब क्रू मेंबर्स ने खुद चोटिल होने के बावजूद सभी की मदद की, खोया हुआ सामान ढूंढा और पानी-प्राथमिक उपचार मुहैया कराया.
DGCA और एयरलाइंस सिस्टम पर खड़े हुए सवाल
इस घटना के बाद यात्रियों ने DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) और एयरपोर्ट अथॉरिटी से कड़े कदम उठाने की मांग की है. यात्रियों का कहना है कि 100-150 से अधिक यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान ऐसे गैर-जिम्मेदार स्टाफ के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती. फ्लाइट टेक-ऑफ से पहले सख्त अल्कोहल और डोप टेस्ट होना अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी की जान खतरे में न पड़े.
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