'किसी को बख्शा नहीं जाएगा...' पेपर लीक पर PM मोदी का बड़ा फैसला, अब फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

न्यूज तक डेस्क

• 09:27 AM • 23 Jul 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए पेपर लीक के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाने का ऐलान किया है. उन्होंने साफ कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जल्द से जल्द कड़ी सजा दी जाएगी.

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दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे धरने प्रदर्शन से निपटने के लिए अब केंद्र सरकार एक्टिव मोड आ गई है. लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच पीएम मोदी ने बड़ा एलान किया है. पीएम ने X (ट्विटर) से एलान किया है कि अब पेपर लीक केस की जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी. 

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पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने ऐलान किया है कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स (Fast-Track Courts) का गठन किया जाएगा.

उन्होंने लिखा, "देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा. इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें."

अधिकारियों को दिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर जानकारी देते हुए बताया कि इस संबंध में संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की श्रृंखला में यह एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय है.

"युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे"

प्रधानमंत्री ने पेपर लीक में शामिल लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, "युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा." सरकार के इस कदम का मकसद न्याय प्रक्रिया को तेज करना है, ताकि पेपर लीक से जुड़े मुकदमों का निस्तारण महीनों और सालों के बजाय कम से कम समय में हो सके और दोषियों में कानून का खौफ पैदा हो.