कल तक आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं में शुमार राघव चड्ढा अब भारतीय जनता पार्टी के भगवा रंग में रंग चुके हैं. अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थामने वाले राघव चड्ढा के लिए पार्टी बदलने का पहला ही दिन काफी चर्चाओं में रहा. बीजेपी जॉइन करते ही उन्हें पार्टी के सख्त अनुशासन और परंपराओं से रूबरू होना पड़ा. राजनीतिक गलियारों में इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि कैसे बीजेपी ने पहले ही दिन यह साफ कर दिया कि संगठन और उसके नियम किसी भी हाई-प्रोफाइल चेहरे से बड़े हैं.
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नाम लेकर संबोधन करना पड़ा भारी
वाकया उस समय का है जब राघव चड्ढा बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर रहे थे. इस दौरान मंच पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मौजूद थे. राघव चड्ढा ने संबोधन के दौरान नितिन नवीन को चार बार 'नितिन नवीन जी' कहकर पुकारा. राघव चड्ढा का यह अंदाज बीजेपी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं को रास नहीं आया. एक के बाद एक चार बार नाम लेकर बुलाना बीजेपी के अनुशासन के दायरे में फिट नहीं बैठ रहा था, जिसके बाद उन्हें मंच पर ही टोक दिया गया.
तरुण चुघ ने सिखाया शिष्टाचार
राघव चड्ढा द्वारा नाम लेकर बुलाए जाने पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने राघव को बीच में ही टोकते हुए स्पष्ट किया कि बीजेपी में वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करने का एक खास तरीका है. तरुण चुघ ने कहा कि 'नितिन नवीन जी' नहीं, बल्कि 'माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी' कहकर बुलाइए. उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी में यही अनुशासन है और संगठन के हर कार्यकर्ता व नेता को इसी रास्ते पर चलना होता है. यह घटना दर्शाती है कि बीजेपी में व्यक्ति विशेष से ज्यादा पद और संगठन की गरिमा को महत्व दिया जाता है.
AAP और BJP के कल्चर में दिखा बड़ा अंतर
इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी और बीजेपी के कार्य करने के तरीकों और अनुशासन के अंतर को भी उजागर किया है. आम आदमी पार्टी में नेताओं को अक्सर 'भैया', 'सर' या नाम के आगे 'जी' लगाकर बुलाने का चलन रहा है, जैसे संजय सिंह को 'संजय भैया' कहना. लेकिन बीजेपी का कल्चर इससे पूरी तरह अलग है. यहां माना जाता है कि पद से बड़ी पार्टी है और पार्टी से बड़ा संगठन. बीजेपी में किसी भी वरिष्ठ नेता या पदाधिकारी को उनके नाम के बजाय उनके पद के साथ सम्मानजनक तरीके से संबोधित करना ही संगठन की परंपरा का हिस्सा है.
हाई-प्रोफाइल चेहरों के लिए संगठन का संदेश
बीजेपी ने पहले ही दिन राघव चड्ढा को अनुशासन का पाठ पढ़ाकर यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना ही हाई-प्रोफाइल क्यों न हो, वह संगठन की परंपराओं से ऊपर नहीं है. राघव चड्ढा जैसे युवा नेता, जो अभी-अभी दूसरी विचारधारा से पाला बदलकर आए हैं, उन्हें बीजेपी के इन सख्त नियमों और शिष्टाचार को सीखने में थोड़ा समय लग सकता है. अब राघव चड्ढा को न केवल भगवा चोला ओढ़ना होगा, बल्कि बीजेपी की उस राजनीति और अनुशासन का भी पालन करना होगा जहां नाम के आगे 'जी' लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि पद का सम्मान ही सबसे बड़ा शिष्टाचार है.
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