राज्यसभा में राघव चड्ढा का चुटीला अंदाज! डिप्टी लीडर पद से हटने के बाद पहली बार बोले, उपसभापति से की खास डिमांड

Raghav Chadha Rajya Sabha speech: राज्यसभा में राघव चड्ढा का चुटीला अंदाज एक बार फिर सुर्खियों में है. डिप्टी लीडर पद से हटने के बाद अपने पहले संबोधन में उन्होंने हरिवंश नारायण सिंह को बधाई देते हुए मजाकिया लहजे में अपनी स्थिति पर टिप्पणी की और अतिरिक्त समय की खास डिमांड रखी. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

Raghav Chadha Rajya Sabha speech
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न्यूज तक डेस्क

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आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में एक बार फिर अपने चिर-परिचित मजाकिया और बेबाक अंदाज से सबका ध्यान खींचा. पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद सदन में यह उनका पहला संबोधन था. राघव चड्ढा ने इस मौके का इस्तेमाल न केवल उपसभापति हरिवंश जी को बधाई देने के लिए किया, बल्कि अपनी नई स्थिति पर चुटकी लेते हुए सदन में मौजूद नेताओं की अनुपस्थिति पर भी टिप्पणी की. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

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'हाल ही में हटाया गया डिप्टी लीडर हूं'

भाषण की शुरुआत में ही राघव चड्ढा ने अपनी वर्तमान स्थिति को लेकर एक मजेदार टिप्पणी की. उन्होंने कहा, 'मेरी पार्टी के नेता सदन में मौजूद नहीं हैं और पार्टी के नवनियुक्त डिप्टी लीडर भी सदन में उपस्थित नहीं हैं. लेकिन मैं, जो हाल ही में हटाया गया डिप्टी लीडर हूं, सदन में मौजूद हूं.' उनकी इस बात पर सदन में हल्का ठहाका भी गूंजा.

हरिवंश नारायण सिंह के साथ 'खट्टा-मीठा' रिश्ता

राघव चड्ढा ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के उपसभापति के रूप में उनकी तीसरी पारी के लिए बधाई दी. उन्होंने अपने और हरिवंश के रिश्ते को 'खट्टा-मीठा' बताया. उन्होंने विस्तार से समझाते हुए कहा कि रिश्ता खट्टा तब होता है जब वे विषय से भटक जाते हैं और हरिवंश जी से डांट खानी पड़ती है, और मीठा तब होता है जब वे सटीक बात करते हैं और उन्हें हरिवंश जी का आशीर्वाद और पर्ची मिलती है. राघव ने मजाकिया लहजे में अनुरोध किया कि उपसभापति महोदय घंटी बजने के बाद भी उन्हें दो-तीन मिनट का अतिरिक्त समय दें ताकि वे अपनी बात मजबूती से रख सकें.

सभापति राधाकृष्णन की भी तारीफ

अपने संबोधन के दौरान राघव चड्ढा ने सभापति सी.पी.राधाकृष्णन की भी जमकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि जब से सभापति जी ने कमान संभाली है, सदन के सदस्यों को बोलने का अधिक अवसर मिल रहा है. राघव ने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले 'जीरो आवर' में केवल 5 से 7 सांसदों को बोलने का मौका मिलता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 15 से 22 तक पहुंच गई है. उन्होंने इसे सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए एक सकारात्मक बदलाव बताया.
 

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