'हम भी जाएंगे...' CJP प्रोटेस्ट में कितनी भीड़ लेकर पहुंचेंगे राकेश टिकैत, खुद ही बता दिया सबकुछ

न्यूज तक डेस्क

09 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 9 2026 2:48 PM)

राकेश टिकैत ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन को BKU का पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है. इसके साथ ही उन्होंने बिहार में किसानों की मंडियों, फसलों के उचित मूल्य और ज़मीन अधिग्रहण के मुद्दों को लेकर पटना में भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

राकेश टिकैत
राकेश टिकैत
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10 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नागरिक अधिकारों और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों (CJP) द्वारा आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन को भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है. किसान नेता राकेश टिकैत ने ऐलान किया है कि देश के युवाओं और किसान कार्यकर्ताओं को इस आंदोलन का हिस्सा बनना चाहिए. 

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10 अक्टूबर के प्रदर्शन को BKU का पूर्ण समर्थन

राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भारतीय किसान यूनियन ने तय किया है कि जो युवा और कार्यकर्ता दिल्ली जाकर 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में भाग लेना चाहते हैं, वे दिल्ली जाएं. इसके अलावा, जो कार्यकर्ता दिल्ली नहीं पहुंच सकते, वे अपने-अपने जिला मुख्यालयों (District Head Quarters) पर विरोध प्रदर्शन कर जिला अधिकारियों (DM) के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपें. 

टिकैत ने कहा कि वह स्वयं 9 अक्टूबर की रात पुणे में चल रहे युवाओं के आंदोलन में रहेंगे और 10 तारीख को आंदोलन का हिस्सा बनते हुए किसी न किसी जिला मुख्यालय पर पहुंचकर ज्ञापन देंगे. उन्होंने चुनाव आयोग के इस्तीफे की भी मांग उठाई है.

'वोट चोरी और नए फॉर्मूले' पर साधा निशाना

राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि देश में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के उम्मीदवारों को डरा-धमकाकर या जांच एजेंसियों का डर दिखाकर चुनाव से पीछे हटने पर मजबूर करने की कोशिश की जा रही है.

बिहार के किसानों और ज़मीन लूट पर जताई चिंता

बिहार दौरे के दौरान खगड़िया पहुंचे राकेश टिकैत ने राज्य में किसानों की समस्याओं पर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पिछले 20-22 सालों से एक षड्यंत्र के तहत किसानों की जमीनें सस्ते दामों पर ली जा रही हैं. टिकैत ने कहा कि 2013 के बाद से सर्किल रेट में बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे किसानों को उनकी ज़मीन का सही मुआवजा नहीं मिल पा रहा है. MSP और मंडी व्यवस्था: बिहार में मंडियां (बाजार समितियां) बंद होने के कारण किसानों को अपनी फसलें एमएसपी से काफी कम दाम पर बेचनी पड़ रही हैं, जिससे अकेले बिहार के किसानों को करीब 1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो रहा है.

पटना में दिल्ली जैसा बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी

राकेश टिकैत ने कहा कि बिहार में किसानों की ज़मीन और फसल बचाने के लिए दिल्ली जैसा ही एक बड़ा आंदोलन पटना में खड़ा करने की जरूरत है. उन्होंने बाहर रहने वाले बिहार के संपन्न लोगों से अपील की कि वे अपने गांवों में किसानों को संगठित करने के लिए मदद करें. 

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