Women Reservation Bill: संसद में गिरा बिल, गुस्साई रेखा गुप्ता पूरी दिल्ली में क्या कर रहीं?

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरने के बाद बीजेपी नेता रेखा गुप्ता ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया और कांग्रेस-सपा पर महिलाओं को राजनीति से दूर रखने की साजिश का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा अब देश के सामने आ चुका है.

दिल्ली बजटो
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न्यूज तक डेस्क

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लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) गिरने के बाद राजधानी दिल्ली में सियासी पारा सातवें आसमान पर है. दिल्ली की कद्दावर नेता और भाजपा की प्रमुख चेहरा रेखा गुप्ता ने इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत पूरे विपक्ष पर तीखा हमला बोला है.

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'फूल नहीं चिंगारी हैं हम...'

राजधानी की सड़कों पर 'फूल नहीं चिंगारी हैं, हम भारत की नारी हैं' के नारों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि हिंदुस्तान की महिलाएं अब अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने जानबूझकर इस बिल का साथ नहीं दिया क्योंकि वे नहीं चाहते कि देश की आधी आबादी (70 करोड़ महिलाएं) विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचें.

विपक्ष के बड़े नेताओं पर साधा निशाना

रेखा गुप्ता ने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा, "कांग्रेस और सपा ने तय कर रखा था कि वे महिलाओं को आगे नहीं आने देंगे. ये लोग कभी जाति तो कभी धर्म के नाम पर आरक्षण की बात करते हैं, तो कभी परिसीमन (Delimitation) का बहाना बनाते हैं. हकीकत यह है कि इन्हें सिर्फ अपने घर की महिलाएं ही राजनीति में अच्छी लगती हैं."

उन्होंने अखिलेश यादव और राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें केवल डिंपल यादव, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ही सदन में दिखनी चाहिए, बाकी 70 करोड़ महिलाओं के हक की उन्हें परवाह नहीं है.

सीटों के विस्तार पर दी दलील

रेखा गुप्ता ने 1971 की जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि जब 543 सीटें तय हुई थीं, तब देश की जनसंख्या करीब 50-55 करोड़ थी. आज जनसंख्या 140 करोड़ पार कर चुकी है, तो सीटें क्यों नहीं बढ़नी चाहिए? उन्होंने आरोप लगाया कि कई नेता 50-50 लाख की जनसंख्या वाली सीटों पर 'मठाधीश' बनकर बैठे हैं और वे नहीं चाहते कि सीटों का बंटवारा हो या कोई महिला उनका प्रतिनिधित्व करे.

'विपक्ष को देना होगा जवाब'

अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष का 'महिला विरोधी चेहरा' अब बेनकाब हो चुका है. जब ये नेता अपनी-अपनी विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में जाएंगे, तो वहां की महिलाएं उनसे सवाल पूछेंगी कि उन्होंने बिल का विरोध क्यों किया. महिलाएं अपना हक लेकर रहेंगी.

 

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