आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने हाल ही में आए चुनावी नतीजों के बाद केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने इन चुनाव परिणामों को लोकतंत्र की जीत मानने से साफ इनकार करते हुए इसे लूटतंत्र का परिणाम बताया है. संजय सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एक स्वतंत्र संस्था के बजाय भारतीय जनता पार्टी के एजेंट के रूप में काम किया और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर जनादेश को प्रभावित किया गया.
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चुनावी नतीजों पर उठाए गंभीर सवाल
संजय सिंह ने कहा कि आज भले ही देश का गोदी मीडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीतियों का गुणगान कर रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. उन्होंने कहा कि क्या वास्तव में यह जनता के फैसले की जीत है? संजय सिंह के अनुसार, जिस तरह से बंगाल के चुनाव को चुनाव आयोग ने प्रभावित किया और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह लोकतंत्र की जीत नहीं बल्कि छल और बल की जीत है.
बंगाल चुनाव और 27 लाख वोटरों का गणित
सांसद संजय सिंह ने बंगाल के नतीजों पर विस्तार से चर्चा करते हुए एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी और टीएमसी के बीच वोटों का अंतर बहुत कम है, लेकिन इस जीत के पीछे एक बड़ा खेल हुआ है. सिंह ने आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से लगभग 27 लाख मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये 27 लाख लोग वोट देते, तो क्या आज बीजेपी को इतनी बड़ी जीत मिलती? उन्होंने इसे ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग का एक बड़ा घोटाला करार दिया.
सेना की तैनाती और विपक्षी एकजुटता पर प्रहार
संजय सिंह ने चुनाव के दौरान बंगाल में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने करीब ढाई लाख सुरक्षा बलों को तैनात किया था. उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका जैसे देश दूसरे देशों से युद्ध लड़ने के लिए महज 5000 सैनिकों का उपयोग करते हैं, लेकिन यहां एक महिला मुख्यमंत्री को हराने के लिए पूरी सैन्य ताकत झोंक दी गई. इसके अलावा, उन्होंने विपक्ष के उन नेताओं पर भी सवाल उठाए जो वहां जाकर ममता बनर्जी के खिलाफ ही प्रचार कर रहे थे, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला.
महंगाई और जनता की खामोशी पर जताई चिंता
संजय सिंह ने केवल सरकार ही नहीं, बल्कि जनता को भी आत्ममंथन करने को कहा. उन्होंने कहा कि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी ने जो वादे किए थे, उनसे कहीं अधिक काम करके दिखाया. इसके बावजूद अगर जनता प्रधानमंत्री के झूठे वादों पर भरोसा करती है, तो यह चिंता का विषय है. उन्होंने बढ़ती महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन जनता का गुस्सा नजर नहीं आ रहा. उन्होंने कहा कि अगर पेट्रोल-डीजल और महंगाई जैसे मुद्दों पर लोग चुप रहेंगे, तो बीजेपी इसी तरह लूटतंत्र का खेल खेलती रहेगी.
मणिपुर और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर घेरा
अपने संबोधन के अंत में संजय सिंह ने देश के सुलगते मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि देश का एक हिस्सा मणिपुर जल रहा है और प्रधानमंत्री खामोश हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का अपमान हो रहा है, बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा झूठा निकला, लेकिन इन सब पर कोई जवाबदेही नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर देश में लोकतंत्र को इसी तरह लूटतंत्र में बदला जाता रहा और हम चुप रहे, तो आने वाला इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा.
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