आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा के 7 सांसदों की सदस्यता और न्यायिक प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार और न्यायपालिका पर तीखा हमला बोला है. राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के मामले पर संजय सिंह ने कहा कि अभी तक सभापति का उनकी सदस्यता रद्द करने वाली याचिका पर कोई फैसला नहीं आया है और पार्टी न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाएगी. विस्तार से जानिए उन्होंने क्या-कुछ कहा.
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'लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभापति के आदेश का इंतजार'
संजय सिंह ने बताया कि राघव चड्ढा और अन्य सांसदों ने विलय के लिए पत्र दिया है, जिसे चेयरमैन ने संज्ञान में लिया है. हालांकि, आम आदमी पार्टी ने इन सात लोगों की सदस्यता रद्द करने के लिए दसवीं अनुसूची के तहत याचिका डाली है. संजय सिंह ने कहा, 'पूरे देश को इंतजार है कि सभापति महोदय लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए क्या फैसला लेते हैं. अगर उनकी सदस्यता रद्द नहीं हुई, तो हमारे पास न्यायालय जाने का रास्ता खुला है.'
अरविंद केजरीवाल का जज स्वर्णकांता को पत्र: 'आपकी अदालत में नहीं आऊंगा'
अरविंद केजरीवाल द्वारा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखी गई चिट्ठी का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा कि केजरीवाल ने उनकी अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया है. संजय सिंह ने दावा किया कि संबंधित जज ने इस मामले में छह ऐसे आदेश दिए हैं जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब जज का रवैया पक्षपाती हो, तो याचिकाकर्ता को अपनी आशंका व्यक्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है.
'आरएसएस के कार्यक्रम में जाने वाले जजों से न्याय कैसे मिलेगा?'
संजय सिंह ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ जज आरएसएस (RSS) के कार्यक्रमों में जाते हैं और गर्व से कहते हैं कि वहां जाने से उनका प्रमोशन हो जाता है. उन्होंने सवाल उठाया, 'बीजेपी और आरएसएस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जब हमारे ऊपर मुकदमा मोदी और अमित शाह की सरकार ने लगाया है, तो आरएसएस समर्थक जज से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?' उन्होंने इसे न्यायिक मर्यादा और आचार संहिता के खिलाफ बताया.
न्यायपालिका पर नहीं, व्यक्तिगत क्रियाकलापों पर सवाल
जब संजय सिंह से पूछा गया कि क्या वे पूरी न्याय प्रणाली को चुनौती दे रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह पूरी जुडिशरी पर बात नहीं है, यह किसी व्यक्तिगत जज के क्रियाकलापों और उनकी निष्पक्षता पर सवाल है. जज की भी अपनी मर्यादा और प्रतिष्ठा होती है, जिसका उन्हें पालन करना चाहिए.'
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