आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह का संसद में दिया गया एक भाषण सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है. बैंक कर्जदारों से जुड़े एक बिल पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने केंद्र सरकार को जमकर घेरा. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह बिल आम आदमी के पैसे की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि बड़े पूंजीपतियों को संरक्षण देने के लिए लाया गया है.
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बैंक डकैती को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश
संजय सिंह ने सदन में कहा कि बैंकों में किसान, मजदूर और कर्मचारियों का खून-पसीने का पैसा जमा है. सरकार यह पैसा एमएसएमई (MSME) सेक्टर या गरीब आदमी को रोजगार के लिए देने के बजाय अपने 'पूंजीपति मित्रों' को दे देती है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "आप पीछे से चंदा लेते हैं और उन्हें धंधा देते हैं. यह बिल बैंकों पर हो रही डकैती को लीगलाइज करने का एक माध्यम है."
कर्ज माफी के चौंकाने वाले आंकड़े किए पेश
सांसद ने सरकार के ही आंकड़ों का हवाला देते हुए कई बड़ी कंपनियों के कर्ज समाधान (Haircut) पर सवाल उठाए:
- वीडियोकॉन: 46,000 करोड़ का बकाया था, केवल 2,900 करोड़ वसूले गए और 94% कर्ज माफ कर दिया गया.
- एबीजी शिपयार्ड: 22,000 करोड़ के बकाये पर 95% की माफी दी गई.
- लैंको इंफ्रा: 47,000 करोड़ के बकाये पर 88% कर्ज माफ किया गया.
- आलोक इंडस्ट्रीज: 83% कर्ज माफ कर दिया गया.
संजय सिंह ने पूछा कि जो 'हेयरकट' (छूट) पूंजीपतियों को दी जा रही है, वही स्कीम किसानों, रेहड़ी-पटरी वालों और छात्रों के लिए क्यों नहीं लाई जाती? उन्होंने कहा कि यह 'हेयरकट' नहीं बल्कि 'गर्दन काट' है, जहां बैंकों का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है.
तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर निशाना साधते हुए संजय सिंह ने एक गाना गुनगुनाया— "तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा." उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम जहां भी यात्रा करते हैं, चाहे वो बांग्लादेश हो, श्रीलंका, केन्या या वियतनाम, वहां उनके 'पूंजीपति मित्र' को ठेके मिल जाते हैं. इस टिप्पणी पर सदन में काफी हंगामा भी हुआ और सत्ता पक्ष ने इन बयानों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की.
एनसीएलटी (NCLT) पर उठाए सवाल
संजय सिंह ने इनसॉल्वेंसी प्रोसेस (दिवाला प्रक्रिया) की आलोचना करते हुए कहा कि एनसीएलटी भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है. उन्होंने मुख्य न्यायाधीश (CJI) के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया अब एक 'मजाक' (Mockery) बनकर रह गई है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि डकैतों और कर्ज लेकर भागने वालों के पासपोर्ट जप्त क्यों नहीं किए जाते, जबकि विपक्षी सांसदों और पत्रकारों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है.
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